चारधाम यात्रा का शंखनाद... अक्षय तृतीया पर खुले गंगोत्री-यमुनोत्री के द्वार, जानें केदार-बद्री के कपाट खुलने की तिथि
देवभूमि उत्तराखंड में आज से भक्ति का महापर्व शुरू हो गया है। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां गंगा और मां यमुना के जयकारों के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री धा ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 19 Apr 2026 03:55:26 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Apr 2026 03:55:26 PM (IST)
जानें केदार-बद्री के कपाट खुलने की तिथिHighLights
- अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर चारधाम यात्रा का हुआ भव्य शुभारंभ
- गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुले, श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
- 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट
धर्म डेस्क। देवभूमि उत्तराखंड में आज से भक्ति का महापर्व शुरू हो गया है। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां गंगा और मां यमुना के जयकारों के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट आज सुबह शुभ मुहूर्त में खोल दिए गए। कपाट खुलते ही हजारों भक्तों ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। प्रशासन ने सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
1. कब खुलेंगे बाबा केदार और बद्री विशाल के द्वार?
चारधाम यात्रा के अन्य दो प्रमुख धामों के कपाट खुलने का इंतजार भी जल्द खत्म होने वाला है। वैदिक पंचांग के अनुसार तिथियां इस प्रकार हैं...
- केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल, 2026 को कपाट खुलेंगे।
- बद्रीनाथ धाम: 23 अप्रैल, 2026 को द्वार भक्तों के लिए खोले जाएंगे।
2. यमुनोत्री और गंगोत्री: मोक्ष और पापों से मुक्ति
यमुनोत्री (मोक्ष की पहली सीढ़ी): यात्रा की शुरुआत यहीं से होती है। यमराज की बहन और सूर्यपुत्री यमुना के इस धाम में स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
गंगोत्री (पापों का नाश): भगीरथ की तपस्या का प्रतिफल मां गंगा यहीं पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। मान्यता है कि यहां की धारा में डुबकी लगाने से जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
3. घर बैठे कैसे पाएं चारधाम का आशीर्वाद?
यदि आप शारीरिक रूप से यात्रा पर नहीं जा पाए हैं, तो इन 5 आसान तरीकों से घर बैठे पुण्य प्राप्त कर सकते हैं...
- पवित्र स्नान: स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पावन नदियों का आह्वान करें।
- मंत्र साधना: 'गंगे च यमुने चैव...' मंत्र का जाप करते हुए मानस पूजा करें।
- अष्टकम पाठ: अक्षय तृतीया पर 'गंगा अष्टकम' या 'यमुना अष्टकम' का पाठ अत्यंत फलदायी है।
- दान-पुण्य: इस विशेष संयोग पर गरीबों को जल, सत्तू या मौसमी फलों का दान करें।
- सात्विकता: मन को शुद्ध रखें और तामसिक विचारों व भोजन से दूरी बनाएं।
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