• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • दतिया उपचुनाव
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • ए आई बूटकैंप
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • धर्म
  • व्रत-त्योहार

25 जुलाई को रखा जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, अमृतसिद्धि और ब्रह्म योग का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पारण का समय

देवशयनी एकादशी पर अमृतसिद्धि योग, शिववास योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे कई शुभ संयोग बनते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद फलदा...और पढ़ें

By Jogendra SenEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 05:40:32 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 05:40:31 PM (IST)
25 जुलाई को रखा जाएगा देवशयनी एकादशी का व्रत, अमृतसिद्धि और ब्रह्म योग का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और पारण का समय
अमृतसिद्धि योग में 25 जुलाई को मनेगी देवशयनी एकादशी।

HighLights

  1. हरिशयनी एकादशी पर चार महायोगों का संगम
  2. एकादशी पर ऐसे से करें शालिग्राम जी का पूजन
  3. उदया तिथि के मान से शनिवार को मनेगा पर्व

नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में 'योगनिद्रा' में चले जाते हैं। इसके बाद वे देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। देवशयनी एकादशी से ही 'चातुर्मास' (चार महीने का पवित्र समय) शुरू हो जाता है। इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे- शादी, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किया जाता है। यह समय केवल जप, तप, व्रत और भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है।

देवशयनी एकादशी पर बनेंगे शुभ योग

देवशयनी एकादशी पर अमृतसिद्धि योग, शिववास योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे कई शुभ संयोग बनते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह नौ बजकर 12 मिनट पर शुरू होकर 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 25 जुलाई को ही मान्य होगा।

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह चार बजकर 16 मिनट से सुबह चार बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
  • संध्या काल मुहूर्त: शाम सात बजकर 17 मिनट से रात आठ बजकर 19 मिनट तक रहेगा।
  • पारण (व्रत तोड़ने) का समय: 26 जुलाई को सुबह पांच बजकर 39 मिनट से आठ बजकर 22 मिनट तक है।

इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

देवशयनी एकादशी पर होगी शालिग्राम जी की पूजा

देवशयनी एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। सूर्य देव को जल चढ़ाएं, फिर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत और पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़क कर उसे साफ करें, पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। शालिग्राम जी को उस पर स्थापित करें। शालिग्राम जी का पंचामृत से अभिषेक करें। फिर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।


यह भी पढ़ें- अगस्त में लगने जा रहा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, दिन में ही छा जाएगा रात जैसा अंधेरा, जानें सूतक काल और जरूरी नियम

उन्हें पीले वस्त्र पहनाकर उनका चंदन और आभूषणों से शृंगार करें। रोली, मौली, हल्दी, गुलाल, अबीर, फूल, फल, धूप, दीप, कपूर और नैवेद्य आदि पूजन में शामिल करें। केला, पंचमेवा, पंजीरी, पंचामृत में से किसी भी व्यंजन का भोग जरूर लगाएं, इसमें तुलसी दल जरूर डालें। 'ओम नमो नारायणाय' मंत्र का जाप करें। देवशयनी एकादशी की कथा पढ़ें और आरती के बाद पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा याचना करें।