देवशयनी एकादशी आज: आज योग निद्रा में लीन होंगे भगवान विष्णु, चातुर्मास के साथ थम जाएंगे मांगलिक कार्य
धार्मिक कथाओं के साथ-साथ इस समय का एक बहुत बड़ा मौसमी महत्व भी बताया गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातावरण में नमी बढ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 25 Jul 2026 08:47:21 AM (IST)Updated Date: Sat, 25 Jul 2026 08:47:54 AM (IST)
HighLights
- शुभ योग, पूजा मुहूर्त और पारण का समय
- चार माह तक के लिए मांगलिक कार्य नहीं होंगे
- चातुर्मास में संयम और व्रत का वैज्ञानिक दृष्टिकोण
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी (या हरिशयनी एकादशी) कहते हैं। यह शनिवार को मनाई जाएगी। सनातन धर्म मंदिर में भगवान चक्रधर, गिरिराज धारण, थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर, फालका बाजार स्थित श्रीराम मंदिर, विष्णु मंदिर, पुराने जिला कोर्ट भवन के पार स्थित गिर्राज मंदिर व जनकगंज स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर में ठाकुरजी का दिव्य श्रृंगार होगा। व्रतधारी व अन्य श्रद्धालु एकादशी की कथा का श्रवण कर दान-पुण्य करेंगे।
'देवशयनी' का अर्थ है 'देवताओं का सोना'। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में 'योगनिद्रा' में चले जाते हैं। इसके बाद वे देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। देवशयनी एकादशी से ही 'चातुर्मास' (चार महीने का पवित्र समय) शुरू हो जाता है। ज्योतिषाचार्य सुनील चौपड़ा ने बताया कि इन चार महीनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे- शादी, मुंडन या गृह प्रवेश नहीं किया जाता है।
यह समय केवल जप, तप, व्रत और भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना गया है। एकादशी पर नगर के प्रमुख मंदिरों में ठाकुरजी का दिव्य श्रृंगार होगा और फलाहारी भोग अर्पित किया जाएगा। घरों में देवों के विश्राम कराने के लिए पूजन होगा।
ये शुभ योग बनेगे
देवशयनी एकादशी पर अमृतसिद्धि योग, शिववास योग, ब्रह्म योग, और इंद्र योग जैसे कई शुभ संयोग बनते हैं। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
एकादशी शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह नौ बजकर 12 मिनट शुरू हुई। 25 जुलाई को सुबह 11 बजकर 34 मिनट समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 25 जुलाई को ही मान्य होगा। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह चार बजकर 16 मिनट से सुबह चार बजकर 57 मिनट तक। संध्या काल मुहूर्त: शाम सात बजकर 17 मिनट से रात आठ बजकर 19 मिनट तक रहेगा। पारण (व्रत तोड़ने) का समय 26 जुलाई को सुबह पांच बजकर 39 मिनट से आठ बजकर 22 मिनट बजे तक है। इस दिन व्रत रखने से सभी पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
वैज्ञानिक नजरिए से महत्व
धार्मिक कथाओं के साथ-साथ इस समय का एक बहुत बड़ा मौसमी महत्व भी बताया गया है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वर्षा ऋतु का समय होता है, जब वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई प्रकार की संक्रामक बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं। इस मौसम में शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए इन चार महीनों में व्रत रखने और बेहद संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि स्वास्थ्य ठीक रहे।