गंगा दशहरा कल... इस दिन 10 वस्तुओं का दान करने से होता है पापों का नाश
इसके अलावा सुबह के इन शुभ मुहूर्त में भी दान किया जा सकता है। ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 24 May 2026 11:47:06 AM (IST)Updated Date: Sun, 24 May 2026 11:54:41 AM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- हस्त नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग
- यह त्योहार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी पावन तिथि पर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। गंगा दशहरा पर्व कल यानी सोमवार को मनाया जाएगा। यह त्योहार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पड़ता है, जब मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का पर्व बेहद श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। मान्यता है कि इस दिन स्नान, जप, तप, दान और पूजा करने से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। इसी कारण इसे दशहरा कहा जाता है।
गंगा दशहरा स्नान-दान मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य सुनील चौपड़ा ने बताया कि सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान का अत्यधिक महत्व होता है। ऐसे में इस दिन सुबह चार बजकर 30 मिनट से लेकर पांच बजकर 30 मिनट तक की अवधि इन कार्यों के लिए उत्तम रहेगी। इसके अलावा सुबह के इन शुभ मुहूर्त में भी दान किया जा सकता है।
यह है महूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त : सुबह चार बजकर 30 मिनट से पांच बजकर 30 मिनट तक
- अमृत चौघड़िया: सुबह पांच बजकर 25 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक।
- शुभ चौघड़िया : सुबह 8 बजकर 51 मिनट से सात बजकर 34 मिनट तक।
- शुभ योग (ग्रह-नक्षत्र): इस दिन हस्त नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग और सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है।
इस दिन यह करें दान
- जल का दान: गर्मी से राहत और जीवन का आधार। मान्यता है कि जल दान से पितृ एवं देवता प्रसन्न होते हैं। इससे चंद्र दोष और मानसिक अशांति कम होती है।
- पंखा या छाता: दूसरों को गर्मी से बचाने का प्रतीक। इससे सूर्य से संबंधित कष्ट और क्रोध कम होते हैं। सेवा और करुणा का भाव बढ़ता है।
- वस्त्र दान: गरीब और जरूरतमंद को सम्मान देने का कार्य। शुक्र ग्रह को मजबूत करने वाला माना जाता है। जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं।
- अन्न दान: सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है। भूखे को भोजन कराने से मां अन्नपूर्णा की कृपा मिलती है, धन और समृद्धि बढ़ती है।
- गुड़ का दान : सूर्य और मंगल को शांत करने के लिए, रिश्तों में मिठास और ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है।
- घी का दान: अग्नि और देव कार्यों से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य, तेज और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने वाला माना जाता है।
- मिट्टी का घड़ा : राहगीरों को ठंडा जल उपलब्ध कराने का पुण्य। इससे घर में शांति और सौभाग्य बढ़ता है। बुध ग्रह अच्छा होता है।
- दक्षिणा या धन दान: योग्य ब्राह्मण, संत या जरूरतमंद को इस दिन दान देने से पूर्ण फल प्राप्त होता है। धन के प्रवाह और लक्ष्मी कृपा के लिए शुभ माना जाता है।
- तिल का दान: पितृ दोष और शनि दोष शांति के लिए श्रेष्ठ, नकारात्मक ऊर्जा कम करने में सहायक माना है।
- फल दान: प्रकृति और सात्विकता का प्रतीक, इससे स्वास्थ्य और पुण्य दोनों की प्राप्ति होती है।