
धर्म डेस्क, ग्वालियर. शहर में देवशयनी एकादशी का पावन पर्व अपार श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री सनातन धर्म मंदिर सहित शहर के तमाम प्रमुख देवालयों में सुबह से ही दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। सनातन परंपरा के अनुसार, इस दिन से भगवान श्री विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में योग-निद्रा में लीन हो जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो गया है और अगले चार महीनों तक विवाह, मुंडन जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया है। अब सभी मांगलिक अनुष्ठान देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास समाप्त होने के बाद ही शुरू होंगे।
ठाकुरजी का दिव्य श्रृंगार और 'राधा रसोई' का सात्विक भोग
सनातन धर्म मंदिर में इस खास मौके पर भगवान चक्रधर और गिरिराज धरण का अलौकिक और मनमोहक आभूषणों से श्रृंगार किया गया। भगवान को मोरपंखी मुकुट, सोने के मकर-आकार के कुंडल, मोतियों की माला के साथ-साथ तुलसी, गेंदा, गुलाब और कमल के फूलों की मालाओं से सजाया गया। मंदिर की प्रसिद्ध 'राधा रसोई' में तैयार किए गए विशेष सात्विक व्यंजनों का ठाकुरजी को भोग लगाया गया। भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित श्री गिरिराज धरण की भावपूर्ण परिक्रमा कर सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई भावुक शयन आरती
रात को शयन आरती के दौरान माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। मुख्य पुजारी पंडित रमाकांत शास्त्री ने सनातन धर्म मंडल के पदाधिकारियों और मौजूद भक्तों के साथ मिलकर भावुक वातावरण में "नैनों में नींद भर आई..." शयन आरती गाई। इसके बाद गर्भगृह में भगवान बालकृष्ण, लड्डू गोपाल, श्री राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और भगवान चक्रधर के लिए शयन (विश्राम) का बिछौना बिछाकर उन्हें योग-निद्रा में कराया गया। पंडित रमाकांत शास्त्री ने कथा सुनाते हुए बताया कि चातुर्मास की यह अवधि मंत्र-जाप, तपस्या, व्रत, दान और ईश्वर-भक्ति के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।
शहर के अन्य मंदिरों में भी रही उत्सव की धूम
देवशयनी एकादशी पर थाटीपुर स्थित द्वारकाधीश मंदिर, जनकगंज स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, फलका बाजार स्थित श्री राम मंदिर और किलागेट स्थित जानकी वल्लभ मंदिर में भी भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया। शाम को पुरानी जिला अदालत भवन के पास स्थित गिरिराज मंदिर में भव्य कीर्तन का आयोजन हुआ।
उधर, मॉडल टाउन स्थित शिव शक्ति धाम में सामूहिक कथा पाठ, भजन-कीर्तन और फलहार भोग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में श्री परशुराम सर्व ब्राह्मण संघ की राष्ट्रीय महासचिव मधु भार्गव के नेतृत्व में महिलाओं ने मंदिर परिसर में पौधरोपण कर प्रकृति सेवा का संदेश दिया। इस अवसर पर महिलाओं को विवाह सामग्री की किट देकर सम्मानित भी किया गया।
भगवान विट्ठल-रुक्मिणी की निकली पालकी यात्रा
आषाढ़ी एकादशी के पावन अवसर पर शहर भगवान विट्ठल की भक्ति में डूबा नज़र आया। देवधर गोराखी से भगवान विट्ठल और माता रुक्मिणी की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
सावन के लिए विशेष तैयारियां
मंदिर समितियों ने बताया कि जल्द शुरू हो रहे सावन के पवित्र महीने में कई धार्मिक व आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान भक्तों के लिए विशेष रुद्राभिषेक मनोरथ पूजन का आयोजन भी होगा, जिसके लिए शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई है।
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