
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर। तीन वर्ष में एक बार आने वाले पुरुषोत्तम मास का समापन सोमवती अमावस्या के साथ 15 जून को होगा। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति बुधादित्य के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि व अमृत सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग का निर्माण कर रही है। इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या भी होगी, जिस पर स्नान-दान एवं पितरों का पूजन किया जाएगा। पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का संयोग 30 वर्ष बाद बन रहा है।
ज्योतिर्विद् शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि अमावस्या तिथि रविवार दोपहर 12.20 बजे शुरू होकर सोमवार सुबह 8.24 बजे तक रहेगी। उदया तिथि में अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। सुबह जहां पुरुषोत्तम मास का अमावस्या तिथि के साथ समापन होगा, वहीं 32 दिन बाद सूर्य का राशि परिवर्तन दोपहर में होगा।
दोपहर 12.58 बजे सूर्य का वृषभ से मिथुन राशि में प्रवेश होगा, जिसे मिथुन की संक्रांति कहा जाता है। पुरुषोत्तम मास में सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता है। मिथुन राशि में ग्रहों के राजा माने वाले सूर्य का आगमन होगा, जबकि बुध मिथुन में पूर्व से मौजूद है। इसके चलते ‘बुधादित्य योग’ बनेगा।
ज्योतिर्विद् पं. श्रीकांत शर्मा के अनुसार 16 जून से 14 दिवसीय शेष शुद्ध ज्येष्ठ मास शुरू होगा। इस बार भगवान विष्णु के प्रिय अधिकमास का संयोग ज्येष्ठ मास के साथ बना है। इसके चलते ज्येष्ठ मास दो मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा।
इसके बीच 17 मई से 15 जून तक का समय ज्येष्ठ अधिकमास कहलाया। इससे पहले 2023 में श्रावण अधिक मास आया था। अधिकमास के समापन के बाद 19 जून से वैवाहिक आयोजन भी शुरू होंगे।
शहरभर में हर ओर अधिक मास का उल्लास दिखाई दिया। इस अवसर पर आस्था एवं सेवा के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। मठ-मंदिर, आश्रम में भागवत, रामायण पारायण सहित विभिन्न अनुष्ठान होंगे। इस अवसर पर हरिधाम, हंसदास, मठ, अन्नपूर्णा मंदिर, राम मंदिर पंचकुइया संतों के सान्निध्य में वृहद स्तर पर कार्यक्रम हुए। इसके साथ जल, गोसेवा सहित भंडारे एवं शैक्षणिक सामग्री के वितरण जैसे कार्य भी हुए।
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