
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। भगवान विष्णु की कृपा के अनुपम पुरुषोत्तम मास की अमावस्या ने सोमवार को संस्कारधानी को एक बार फिर आस्था के विराट उत्सव में बदल दिया। मां नर्मदा के घाटों पर श्रद्धा ऐसी उमड़ी कि तटों ने मानो मानव सागर का रूप ले लिया।
प्रति तीन वर्ष में आने वाला यह विशेष धार्मिक संयोग श्रद्धालुओं के लिए पुण्य संचय का अवसर माना जाता है। इसी विश्वास के साथ जबलपुर ही नहीं, आसपास के गांवों और दूरस्थ अंचलों से भी बड़ी संख्या में लोग नर्मदा तट पहुंचे।
किसी ने परिवार सहित स्नान कर पूजन-अर्चन किया, तो किसी ने दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की। घाटों पर सफेद धोतियों, रंग-बिरंगी साड़ियों, मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि ने ऐसा दृश्य रचा, मानो पूरी नगरी एक साथ भक्ति में निमग्न हो गई हो।
महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे, सभी के चेहरों पर आस्था का उजास दिखाई दिया। नर्मदा तटों पर कहीं कथा-पूजन चल रहा था तो कहीं श्रद्धालु मौन साधकर मां रेवा का स्मरण कर रहे थे। स्नान के बाद लोगों ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य सामग्री का दान कर पुण्य अर्जित किया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन भी पूरे दिन सक्रिय रहा। घाटों पर सुरक्षा बलों की तैनाती, भीड़ नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं के कारण लोगों को अपेक्षाकृत सुगमता से स्नान और दर्शन का अवसर मिला। वहीं स्थानीय नागरिकों ने ध्यान दिलाया कि ऐसे पर्व केवल आस्था के नहीं, आजीविका के भी अवसर होते हैं।
बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले छोटे दुकानदार और फेरी व्यवसायी भी इन आयोजनों से जुड़े रहते हैं। नागरिकों ने प्रशासन से अपेक्षा की कि इन छोटे व्यापारियों को भी आवश्यक सुविधाएं और सहयोग मिले, ताकि आस्था का यह उत्सव उनके जीवन में भी खुशहाली का प्रकाश भर सके।
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