तीन साल बाद परमा एकादशी का महासंयोग: इस दिन अन्नदान और जलसेवा का विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को सुबह 12 बजकर 57 बजे प्रारंभ होकर रात्रि 10 बजकर 36 मिनिट तक रहेगी। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 08 Jun 2026 10:56:38 AM (IST)Updated Date: Mon, 08 Jun 2026 11:05:33 AM (IST)
एआई से बना चित्र।HighLights
- पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी 11 जून को
- कुबेर और राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है महिमा
- ग्वालियर शहर के मंदिरो में तैयारियां शुरू
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। सनातन धर्म में भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाने वाले पुरुषोत्तम मास की परमा एकादशी 11 जून गुरुवार को मनाई जाएगी। अधिकमास में आने वाली यह दुर्लभ एकादशी लगभग तीन वर्ष में एक बार पड़ती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है। नगर के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिकमास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को सुबह 12 बजकर 57 बजे प्रारंभ होकर रात्रि 10 बजकर 36 मिनिट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, श्रद्धालु 11 जून को परमा एकादशी का व्रत रखेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्यों एवं धर्माचार्यों के अनुसार, परमा एकादशी का व्रत सभी एकादशियों में विशेष फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धन के देवता कुबेर ने इसी व्रत के प्रभाव से विशेष सिद्धि प्राप्त की थी, वहीं सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को भी इस व्रत के पुण्य प्रभाव से अपना खोया हुआ वैभव पुनः प्राप्त हुआ था।
सनातन धर्म मंदिर, जनकगंज स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर व विभिन्न विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ और विष्णु सहस्रनाम के पाठ आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेंगे और भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसी दल, फल और मिष्ठान अर्पित करेंगे। कई स्थानों पर रात्रि जागरण एवं भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।
धर्माचार्यों ने बताया कि परमा एकादशी पर अन्नदान, जलसेवा, फल वितरण व जरूरतमंदों की सहायता का विशेष महत्व है। उनका कहना है कि इस दिन सेवा और दान के कार्य करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और मानवता के कार्यों में भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया गया है।