सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग के महासंयोग में कल रखी जाएगी पद्मिनी एकादशी, जानें महत्व
यह एकादशी केवल अधिकमास में ही आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 26 May 2026 01:28:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 26 May 2026 01:29:04 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्र।HighLights
- अधिकमास के कारण बदला निर्जला एकादशी का गणित
- उदयातिथि के अनुसार कल रहेगा व्रत
- हजारों यज्ञों के बराबर महापुण्य
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी, जिसे कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। ये एकादशी 27 मई को मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि अधिकमास की पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है।
यह एकादशी केवल अधिकमास में ही आती है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि कुछ मंदिरों में एकादशी मंगलवार को मनाई जाएगी। श्रीगिर्राज मंदिर के प्रमुख पुजारी मनोज बुधौलिया व भागवताचार्य मनोज शास्त्री ने बताया कि एकादशी का व्रत 27 मई बुधवार को रखा जाएगा। हर वर्ष गंगा दशहरा के दूसरे दिन निर्जला एकादशी मनाई जाती है, लेकिन पुरुषोत्तम मास का माह होने के कारण निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में आने वाली एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। कमला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के बुरे दिन भी अच्छे दिन में बदल जाते हैं। अधिकमास में पड़ने वाली एकादशी हजारों यज्ञों और तीर्थ स्थानों के बराबर फलों की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अधिक मास एकादशी पर रवि और सर्वार्थ सिद्धि का योग भी बन रहा है, जिससे व्रत का महत्व काफी बढ़ गया है। आइए जानते हैं तिथि, महत्व और पूजा मुहूर्त। इस साल निर्जला एकादशी 25 जून गुरुवार को मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि का समय और शुभ मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ 26 मई, सुबह पांच बजकर 10 मिनट
- एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई, सुबह छह बजकर 21 मिनट। उदयातिथि मान्य होने के कारण पद्मिनी एकादशी व्रत 27 मई को रखा जाएगा।
- पद्मिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त: ब्रह्रा मुहूर्त सुबह चार बजकर तीन मिनट से लेकर चार बजकर 44 मिनट तक रहेगा। ऐसे में इस मुहूर्त में स्नान, व्रत और पूजा का संकल्प ले सकते हैं। इसके अलावा अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त में सुबह सात बजकर आठ मिनट से लेकर आठ बजकर 52 मिनट तक और शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर 12 बजकर 18 मिनट तक के बीच भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन किया जा सकता है।