
रामकृष्ण मुले, नईदुनिया, इंदौर : इस बार बालू से बने पिता शिव एवं माता पार्वती के साथ एक दिन 17 वर्ष बाद पार्थिव गणेश 14 सितंबर को विराजेंगे इस दिन अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखेगी। साथ ही गाजे-बाजे के साथ प्रथम पूजनीय माटी के भगवान गणेश को भी घर-घर में विराजित किया जाएगा।
इस अवसर पर भोलेनाथ के प्रिय दिवस सोमवार को चित्र नक्षत्र, ब्रह्म योग और तुला राशि के चंद्रमा रहेगा। इसके चलते गणेशोत्सव दस बढ़कर बारह दिवसीय हो जाएगा।ज्योतिर्विदों के अनुसार यह संयोग पिछले 27 वर्ष में तीन बार बना है। इसमें एक सितंबर 2000, 23 अगस्त 2009 और 14 सितंबर 2026 की तारीख शामिल है।
मध्यप्रदेश ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के प्रदेशाध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक के अनुसार यह धर्म और आस्था के लिहाज से एक दुर्लभ संयोग है।हर वर्ष यह दोनों पर्व अलग-अलग दिन आते है। लंबे समय बाद हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन मनाया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल तृतीया 14 सितंबर के दिन सूर्योदयकालीन तृतीया और मध्यान्ह व्यापिनी चतुर्थी होने के कारण दोनों पर्वों का संयोग बन रहा है।
ज्योतिर्विद विनायक चतुर्वेदी बताते है कि पंचांग गणना के अनुसार 13 सितंबर रविवार को द्वितीया तिथि सुबह 7.08 बजे तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि प्रारंभ होगी, जो 14 सितंबर सोमवार को सुबह 7.06 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जो 15 सितंबर को सुबह 7.43 बजे तक रहेगी।
इस प्रकार 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया और मध्यान्ह के समय चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी। इसके चलते अधिकांश पंचागों ने दोनों पर्वों को साथ बताया है। हालांकि 10 में दो पंचांगों ने मतांतर के साथ इन्हें अलग-अलग दिन भी दर्शाया है।
हरतालिका तीज पर सौभाग्यवती महिलाएं अखंड सौभाग्य के साथ पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखेंगी। महिलाएं बालू या काली मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। तीज की कथा श्रवण के साथ रात्रि जागरण भी किया जाएगा। इसी दिन मध्यान्ह व्यापिनी चतुर्थी होने से प्रथमपूज्य भगवान श्री गणेश का प्राकट्योत्सव भी मनाया जाएगा। घरों और मंदिरों में भगवान गणेश की स्थापना, पूजन और आरती होगी।
इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी के साथ ही तिथियों के विस्तार गणेशोत्सव 12 दिन का हो जाएगा। यह 14 सितंबर से अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। ज्योतिर्विद् शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार पंचांग में तिथियों के निर्धारण सूर्य और चंद्रमा की भौगोलिक स्थिति के आधार पर होता है। प्रत्येक तिथि की समयविधि समान नहीं होती है। इस बार कई तिथियों की अवधि 24 घंटे से अधिक है।
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