सावन माह 30 जुलाई से होगा शुरू: इस बार पड़ेंगे 4 पवित्र सोमवार, जानें पूजा विधि और धार्मिक महत्व
श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 11:40:20 AM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 11:40:43 AM (IST)
HighLights
- श्रावण मास का धार्मिक महत्व
- सावन सोमवार की महत्वपूर्ण तिथियां
- शिव पूजन की सरल एवं सटीक विधि
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखने वाला सावन माह इस वर्ष 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा। सावन माह भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक के साथ धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।
सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की आराधना और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगे।
श्रावण हिंदू पंचांग का महीना है पांचवां
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा के अनुसार श्रावण हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है। धार्मिक दृष्टि से इसे बेहद पवित्र माना गया है। सावन माह में भगवान शिव की पूजा करने और शिवलिंग पर जल अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान श्रद्धालु सुबह से ही शिवालयों में पहुंचकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। सावन के दौरान प्रकृति भी मानसून की वर्षा से हरियाली से भर उठती है, जिससे वातावरण में आध्यात्मिकता के साथ प्राकृतिक सौंदर्य भी दिखाई देता है।
सावन माह में इस बार चार सोमवार पड़ेंगे। पहला सावन सोमवार तीन अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा सावन का सोमवार 24 अगस्त को होगा। इन दिनों मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। भक्त भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। कई श्रद्धालु सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करेंगे।
इस विधि से करें शिव आराधना
सावन सोमवार को सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित कर चंदन का तिलक लगाया जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, अक्षत, सफेद फूल और शमी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं। माता पार्वती को सिंदूर और शृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जाता है। श्रद्धालु सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ या श्रवण करने के बाद आरती करते हैं और भगवान शिव से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करते हैं।