Sheetala Ashtami: रंगपंचमी के बाद शीतला माता की आराधना, सौभाग्यवती महिलाएं सुख-समृद्धि के लिए करती हैं व्रत और पूजन
होली के बाद आने वाले कृष्ण पक्ष की अष्टमी को निरोग की कामना के साथ शीतला माता का पूजन किया जाता है और एक दिन पूर्व निर्मित भोग सामग्री का माता शीतला क ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 09 Mar 2026 06:54:33 PM (IST)Updated Date: Mon, 09 Mar 2026 06:54:32 PM (IST)
रंगपंचमी के बाद शीतला माता की आराधना। (Image Source: AI-Generated)HighLights
- ग्वालियर में आस्था के साथ मनाया गया बसोड़ा
- महिलाओं ने माता शीतला को अर्पित किया जल
- अष्टमी पर देवी पार्वती के स्वरूप की आराधना
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। होली के बाद आने वाले कृष्ण पक्ष की अष्टमी को निरोग की कामना के साथ शीतला माता का पूजन किया जाता है और एक दिन पूर्व निर्मित भोग सामग्री का माता शीतला को भोग लगाया जाता है। वैसे मान्यता है कि रंगपंचमी के पहले सोमवार या शुक्रवार को बसोड़ा पूजा जाता है। रंगपंचमी के दूसरे दिन शीतला माता का पूजन सौभाग्यवती महिलाओं ने शीतल जल अर्पित कर किया। इसके बाद होलिका स्थल का पूजन किया। बसोड़ा के दिन चूल्हा नहीं जलाने का विधान है।
धार्मिक मान्यता और रोगों से रक्षा की परंपरा
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि हिंदू धर्म में चैत्र महीने के दौरान कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं। इन्हीं में से एक है शीतला अष्टमी, जिसे कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है। बासोड़ा या बसौड़ा पूजा मुख्य रूप से देवी शीतला को समर्पित है, जो होली के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर की जाती है। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है और उनसे परिवार की सेहत और रोगों से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।