सोमवती अमावस्या आज, जबलपुर के नर्मदा घाटों में पितृ शांति विधान, तर्पण, दान-पुण्य समेत विशेष आयोजन
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण पूर्वजों तक पहुंचता है और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 13 Jun 2026 10:50:14 AM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 07:19:27 AM (IST)
अमावस्या को पितरों के तर्पण और उनकी आत्मिक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।HighLights
- पितृ शांति विधान, तर्पण, दान-पुण्य और स्नान का होगा क्रम
- पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का साक्षी बनेगा
- परिवार में सुख, समृद्धि व मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शिवतनया नर्मदा तट एक बार फिर श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का साक्षी बनने जा रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या पर जबलपुर के विभिन्न नर्मदा घाटों में पितृ शांति विधान, तर्पण, दान-पुण्य और स्नान के विशेष आयोजन होंगे।
इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण पूर्वजों तक पहुंचता है
सनातन परंपरा में अमावस्या को पितरों के तर्पण और उनकी आत्मिक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण पूर्वजों तक पहुंचता है और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
पवित्र नदियों में अमावस्या स्नान का विशेष महत्व
इस बार अमावस्या तिथि 14 जून की दोपहर से प्रारंभ होकर 15 जून तक रहेगी। तिथि के उदयकालीन प्रभाव के कारण श्रद्धालु 15 जून की सुबह नर्मदा स्नान कर तर्पण और पितृ शांति के अनुष्ठान संपन्न करेंगे। पुराणों में गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में अमावस्या स्नान का विशेष महत्व बताया गया है।