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दुर्लभ योगों के संयोग के साथ शुरू होने जा रहा श्रावण मास महादेव के साथ ही मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी रहेगा खास

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा श्रावण मास अनेक अद्भुत, अलभ्य और दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रीय संयोगों से युक्त रहेगा। ज्यो...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 12:02:14 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 12:02:14 PM (IST)
दुर्लभ योगों के संयोग के साथ शुरू होने जा रहा श्रावण मास महादेव के साथ ही मां लक्ष्मी की आराधना के लिए भी रहेगा खास
भगवान महाकाल। (फोटो मंदिर समिति)

HighLights

  1. शताब्दियों में पहली बार श्रावण के हर सोमवार पर रहेगी अलभ्य योगों की साक्षी
  2. भगवान शिव को प्रिय यह माह जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप तथा काम्य अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जा रहा है
  3. दुर्लभ योगों के महासंयोगों ने इस पुण्य पवित्र मास को माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भी खास बना दिया है

राजेश वर्मा, नईदुनिया, उज्जैन। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा श्रावण मास अनेक अद्भुत, अलभ्य और दुर्लभ ग्रह-नक्षत्रीय संयोगों से युक्त रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार श्रावण की शुरुआत अकल्पनीय महायोग के साथ तो हो ही रही है, पूरे श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार पर भी विशेष शुभ योगों का निर्माण होगा।

ऐसे में भगवान शिव को प्रिय यह माह जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप तथा काम्य अनुष्ठानों के लिए विशेष माना जा रहा है। खास बात यह है कि श्रावण मुख्यत: भगवान शिव की साधना, आराधना का माह माना जाता है, लेकिन इस बार दुर्लभ योगों के महासंयोगों ने इस पुण्य पवित्र मास को माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भी खास बना दिया है।


श्री महाकाल विद्वत परिषद प्रमुख आचार्य पं.आशीष अग्निहोत्री ने बताया 30 जुलाई को श्रावण मास का आरंभ श्रवण नक्षत्र की साक्षी में आयुष्मान व सौभाग्य योग के दुर्लभ संयोग में होगा। योग और नक्षत्र के मान से यह ऐसा दिव्य संयोग है कि इसमें शुरू की गई शिव आराधना निश्चित ही मनोवांछित फल प्रदान करने वाली मानी गई है। कोई भी भक्त 30 जुलाई से 28 अगस्त श्रावणी पूर्णिमा तक भक्ति भाव से यथा विधि अगर भगवान शिव की आराधना करें तो इच्छित फल की प्राप्ति कर सकते हैं।

धर्मशास्त्र में किसी भी उत्सव अथवा पर्व त्यौहार की शुभता उसके प्रथम दिन से देखी जाती है, साधक आराधक को उस शुभ योग में अपनी साधना आराधना शुरू कर देना चाहिए। लेकिन इस बार श्रावण के संबंध में धर्मशास्त्र का मत है कि इस का हर दिन शुभ है। श्रावण के मास में इस बार चार सोमवार रहेंगे और हर सोमवार विशेष महासंयोगों से युक्त है।

श्रावण सोमवार कब और क्या खास

3 अगस्त : श्रावण का पहला सोमवार

विशेष : सुकर्मा और धृति योग का अद्भुत संयोग। इस दिन आरोग्य व सौभाग्य की वृद्धि के लिए शिव की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।

10 अगस्त : श्रावण का दूसरा सोमवार

विशेष : सोम प्रदोष का महासंयोग। श्रावण मास में शिव को प्रिय वार और तिथि का एक साथ होना महासौभाग्य माना जाता है, इस दिन रूद्राभिषेक करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

17 अगस्त : श्रावण का तीसरा सोमवार

विशेष : सोमवार व नागपंचमी एक ही दिन होगा कालसर्प दोष निवारण तथा विशेष मनोकामना पूर्ति के लिए सबसे चमत्कारी दिन माना गया है।

24 अगस्त : श्रावण का चौथा सोमवार

विशेष : श्रावण का आखिरी सोमवार होने से यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का आखिरी विशेष अवसर होगा। इस दिन शिव को प्रिय सभी विशेष सामग्री अर्पण करें तथा फल प्राप्ति की प्रार्थना करें।

हर भक्त के लिए यह दिन खास

12 अगस्त : सावन शिव रात्रि

विशेष : श्रावण शिव रात्रि की दुर्लभ साक्षी। इस दिन तड़के 4.30 से सुबह सूर्योदय तक शिव पूजा अर्चना करने से सभी संकट तथा असाध्य रोग दूर होते हैं।

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