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योगनिद्रा में गए जगत के पालनहार, अब चातुर्मास में भगवान महादेव संभालेंगे सृष्टि की कमान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि से जगत के पालनहार भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले गए हैं। अब कार्तिक शुक...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 08:58:28 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 08:58:28 AM (IST)
योगनिद्रा में गए जगत के पालनहार, अब चातुर्मास में भगवान महादेव संभालेंगे सृष्टि की कमान
भगवान श्री हरि ने भगवान महादेव को सौंपा सृष्टि का भार। (एआई इमेज)

HighLights

  1. जगत के पालनहार भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले गए हैं
  2. अब कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक भगवान विष्णु शयन मुद्रा में रहेंगे
  3. भगवान विष्णु की अनुपस्थिति में सृष्टि के संचालन, संरक्षण और व्यवस्था का पूरा दायित्व भगवान भोलेनाथ संभालेंगे

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सनातन धर्म में विशेष आध्यात्मिक महत्व रखने वाला चातुर्मास (चार महीने की अवधि) देवशयनी एकादशी के साथ ही प्रारंभ हो गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि से जगत के पालनहार भगवान विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले गए हैं। अब कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) तक भगवान विष्णु शयन मुद्रा में रहेंगे। इस दौरान भगवान विष्णु की अनुपस्थिति में सृष्टि के संचालन, संरक्षण और व्यवस्था का पूरा दायित्व भगवान भोलेनाथ संभालेंगे। यह माना जाता है कि भगवान विष्णु ने स्वयं शिवजी को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

चातुर्मास का धार्मिक महत्व

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का समय 'चातुर्मास' कहलाता है। इन चार महीनों में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। इन महीनों में भगवान शिव ही सृष्टि के समस्त कार्यों की देखरेख करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान सावन (श्रावण) का महीना आता है, जिसमें महादेव की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और साधना का विधान है।


लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में विशेष पूजा

छत्रीबाग स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में देवशयनी एकादशी के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पुजारी शिवम पांडे ने शयनोत्सव की प्रक्रिया करवाई। भगवान विष्णु का अभिषेक किया गया और उन्हें शयन मुद्रा के लिए तैयार किया गया।

शयनोत्सव की प्रक्रिया:

  • अभिषेक और श्रृंगार: पंचामृत और गंगाजल से भगवान विष्णु का अभिषेक किया गया। तत्पश्चात, पीतांबर, चंदन और तुलसी दल से श्रीहरि का श्रृंगार किया गया।
  • महाआरती और भजन: श्रृंगार के बाद भगवान की महाआरती की गई। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि और भजनों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
  • पालकी और शयन की तैयारी: शेषनाग की शैया के प्रतीक स्वरूप पालकी सजाई गई। भगवान विष्णु को इस पालकी में विराजमान कर उनके शयन की तैयारी की गई।

चातुर्मास में नियम और संयम

चातुर्मास के दौरान व्रत और संयम का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन चार महीनों में व्यक्ति को खान-पान पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए। कई लोग इस दौरान एक समय ही भोजन करते हैं और बिस्तर के बजाय जमीन पर सोते हैं। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि इन महीनों में संयम का पालन करने से मन और शरीर स्वस्थ रहता है।

सावन में महादेव की पूजा का विशेष महत्व

चातुर्मास के दौरान सावन महीने का विशेष धार्मिक महत्व है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा की जाती है। माना जाता है कि सावन में शिवजी की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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