
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पर्व रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को हर्षोल्लास मनाया जाएगा।भद्रा रहित उदया श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर दिनभर भाई की कलाई पर बहन के हाथों रेशम की डोर बांधी जाएगी। इसके साथ ही आराध्य और गुरु को भी भक्त राखी समर्पित करेंगे।
मठ-मंदिरों में भी रक्षा सूत्र बांधने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचेंगे। खजराना गणेश को 40 बाय 40 इंच की सनातनी राखी तो अग्रसेन महाराजा अग्रसेन भगवान श्रीनाथ को चित्रित की गई भव्य राखी समर्पित की जाएगी।
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9.08 बजे शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9.48 बजे तक रहेगी। खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, इसलिए राखी बांधने के लिए भद्रा के कारण इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
ज्योतिर्विद् श्यामप्रसाद तिवारी के अनुसार पंचांग में रक्षाबंधन के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है, ऐसे में उदयातिथि के मान से दिनभर बहने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेगी।इस तरह इस वर्ष रक्षाबंधन भद्रा रहित श्रावण पूर्णिमा और विशेष खगोलीय-ग्रह स्थिति के कारण धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष रहेगा।
- सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त : सुबह 6.23 से 09.48 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12.14 से 01.05 बजे तक।
- गोधूलि मुहूर्त : शाम 6.57 से शाम 07.19 बजे तक।
- लाभ : सुबह 07.57 से 09.31 बजे तक।
- अमृत : सुबह 09.32 से 11.05 बजे तक।
- शुभ : दोपहर 12.40 से 02.14 बजे तक।
- चर : शाम 05.22 से से 06.57 बजे तक।
- राहुकाल : सुबह 11.06 से दोपहर 12.40 बजे तक।
चंद्रग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं
- चंद्रग्रहण सुबह 6.55 से दोपहर 12.30 बजे तक।
श्री अग्रसेन क्लब की संस्थापिका राधा देवी मित्तल ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी सुबह 11:00 बजे महाराजा अग्रसेन को बहनों द्वारा बनाई एक भव्य राखी अर्पित की जाएगी। इसमें भगवान श्रीनाथ के दर्शन होंगे। राखी बनाने के तैयारी पिछले एक माह से की जा रही थी।
देश-विदेश में ख्यात शहर के खजराना गणेश मंदिर में भगवान को विशेष चालीस इंच की राखी समर्पित की जाएगी।राष्ट्र भाव विषय पर बनी चालीस इंच की इस सनातन राखी में राष्ट्र प्रथम के भाव होगा। मातृश्री पालरेचा परिवार द्वारा तैयार राखी में वंदे मातरम् की 150 वर्ष की राखी के साथ ही भोजशाला में मां वाग्देवी की पुर्नस्थापना का संदेश भी समाहित किया गया है इसके साथ ही महाकाल, भगवान जगन्नाथ भी दिखाई देंगे। इसमें धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उल्लास को कलाकार बारीक से उकेर कर अंतिम रूप दे रहे है।