
धर्म डेस्क। इस बार का गणेश उत्सव कुछ खास है। इस बार यह 10 नहीं 12 दिन का होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक चलता है। यह अवधि मुख्य रूप से 10 तिथियों (चतुर्थी से चतुर्दशी) की होती है।
गणेश चतुर्थी (14 सितंबर) को भगवान गणेश की स्थापना होगी और अनंत चतुर्दशी (25 सितंबर) को विसर्जन किया जाएगा। स्थापना और विसर्जन वाले दोनों दिनों को मिलाकर कुल 12 कैलेंडर दिन बनते हैं।
ज्योतिष पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि पंचांग में किसी तिथि की वृद्धि या क्षय के कारण दिनों की संख्या में 1 दिन का अंतर आ सकता है, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यह 10-दिवसीय मुख्य उत्सव ही माना जाता है जिसे लोग अपनी श्रद्धा अनुसार 12 दिनों के कैलेंडर विस्तार में मनाएंगे।
इस बार आराधना का लंबा अवसर मिला है कैलेंडर की तिथियों के अनुसार 14 सितंबर से 25 सितंबर तक भक्तों को बप्पा की सेवा, पूजा-अर्चना और मोदक के भोग का 12 दिनों का अवसर मिल रहा है। भक्तगण इस बार पूरे 12 दिनों तक गणपति बप्पा की सेवा और आराधना कर सकेंगे
नौ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पंचांग में तिथियों के इस प्रकार मेल खाने से यह उत्सव और भी विशिष्ट व फलदायी माना जा रहा है। पंचांग गणना के अनुसार तिथियों के घट-बढ़ से कई वर्षों बाद इस तरह का पंचांगीय संयोग बनता है।
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वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है, जो भगवान गणेश के पिता हैं। पिता और पुत्र के इस अद्भुत संयोग से इस बार का उत्सव आध्यात्मिक रूप से बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
तिथियों की वृद्धि:- हिन्दू पंचांग और तिथियों की गणना के अनुसार, इस बार तृतीया तिथि से लेकर अनंत चतुर्दशी तक का योग ऐसा बन रहा है कि उत्सव की कुल अवधि बढ़कर 12 दिन हो गई है।
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ:- 14 सितंबर 2026 को सुबह 05:22 बजे से
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि समाप्त:- 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:14 बजे तक
मध्याह्न गणेश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त:- दोपहर 12:09 से 12:58 तक।
गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त:- मध्याह्न 11:20 से 01:48 तक।
शाम को पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त:- 06:42 से 07:05 तक।
चंद्र दर्शन निषेध (चंद्रमा न देखें): पंडित शर्मा ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखना वर्जित माना जाता है। 14 सितंबर को सुबह 09:12 बजे से रात 08:58 बजे तक चंद्र दर्शन से बचें (मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या कलंक लगता है)।
चौकी व दिशा:- पूजा स्थान पर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में लकड़ी की चौकी पर लाल8 या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की नई मूर्ति स्थापित करें।
प्रिय भोग व सामग्री:- गणेश जी की स्थापना के समय दूर्वा (दूब घास), मोदक या बेसन के लड्डू, लाल फूल (जासवंद/गुड़हल), अक्षत और शमी के पत्ते अवश्य अर्पित करें।