दीपावली से पहले दो दिन महामुहूर्त, 128 वर्षों बाद रवि पुष्य पर धनयोगों की होगी बरसात
ज्योतिषीय गणना के अनुसार दोनों दिनों में आठ-आठ शुभ संयोगों का विशेष योग लगभग 128 वर्षों बाद बन रहा है। ऐसे में सोने-चांदी के आभूषण, भूमि-भवन, वाहन, नए प्रतिष्ठान, बही-खाते और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए ये दिन विशेष महत्व रखेंगे।
Publish Date: Sat, 31 Oct 2026 02:07:41 PM (IST)Updated Date: Sat, 31 Oct 2026 02:12:14 PM (IST)
पुष्य नक्षत्र।HighLights
- एक और दो नवंबर को पुष्य नक्षत्र का संयोग।
- आठ-आठ शुभ योगों में खरीदारी का मुहूर्त है।
- निवेश, नए कारोबार की शुरुआत का अवसर।
धर्म डेस्क। दीपावली की जगमगाहट से पहले बाजारों में धनतेरस जैसी रौनक लाने वाला दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। एक-दो नहीं, लगातार दो दिन यानी 1 और 2 नवंबर को पुष्य नक्षत्र का महामुहूर्त रहेगा। विशेष बात यह है कि रविवार को रवि पुष्य योग और सोमवार को पुष्य नक्षत्र के साथ अनेक शुभ योगों का संयोग बन रहा है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार दोनों दिनों में आठ-आठ शुभ संयोगों का विशेष योग लगभग 128 वर्षों बाद बन रहा है। ऐसे में सोने-चांदी के आभूषण, भूमि-भवन, वाहन, नए प्रतिष्ठान, बही-खाते और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए ये दिन विशेष महत्व रखेंगे।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों में पुष्य को अत्यंत शुभ और समृद्धि प्रदान करने वाला नक्षत्र माना गया है। इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है।
मान्यता है कि पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई वस्तु स्थायी सुख-समृद्धि का आधार बनती है। विशेषकर सोना, चांदी, भूमि, भवन और अन्य स्थायी संपत्तियों की खरीद को शुभ माना जाता है। नए व्यापार की शुरुआत, प्रतिष्ठान का शुभारंभ और निवेश के लिए भी यह नक्षत्र महत्वपूर्ण है।
1 नवंबर को 22 घंटे रहेगा पुष्य नक्षत्र, भूमि भवन, सोना-चांदी, वाहन खरीदारी करेगी शुभ फल प्रदान
दो दिन, दो विशेष ज्योतिषीय संयोग
- ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार 1 नवंबर रविवार को प्रातः 10 बजकर 16 मिनट से पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा, जो 2 नवंबर सोमवार को प्रातः 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
- रविवार को पुष्य नक्षत्र के साथ रवि पुष्य योग बनेगा। इस दिन शंख, लक्ष्मी, शश, हर्ष, सरल, साध्य, मित्र और गजकेसरी योग का संयोग रहेगा। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि गुरु की राशि में रहेगा।
- मंगल और चंद्रमा की युति भी इस दिन के ज्योतिषीय महत्व को बढ़ाएगी। वहीं, सोमवार दो नवंबर को पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थसिद्धि, शुभ, श्रीवत्स, अमला, वाशि और सरल सहित अन्य शुभ संयोग बनेंगे।
- अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि योग भी इस दिन के महत्व को बढ़ाएंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इन संयोगों में की गई खरीदारी, निवेश और नए कार्यों की शुरुआत शुभ फलदायी होती है।
सोना ही नहीं, संपत्ति और कारोबार के लिए भी शुभ
- पुष्य नक्षत्र में सोना खरीदने की विशेष परंपरा है, लेकिन इसका महत्व केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है।
- भूमि-भवन, फ्लैट की बुकिंग, वाहन, दुकान, मशीनरी, धार्मिक सामग्री, बही-खाते, चांदी-तांबे की वस्तुएं और स्फटिक से निर्मित पूजन सामग्री खरीदना भी शुभ माना जाता है।
- व्यापारी नए बही-खाते शुरू कर सकते हैं, वहीं नए उद्यम और व्यवसाय की आधारशिला रखने के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण है।
- ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार राशि और ग्रह स्वामी के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में खरीदारी तथा निवेश के संकेत मिलते हैं।
- हालांकि निवेश का निर्णय अपनी आर्थिक क्षमता, जरूरत और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही लेना चाहिए।