
भरत मानधन्या, नईदुनिया, इंदौर। डीप-टेक के क्षेत्र में इंदौर से शुरू हुआ एक स्टार्टअप अब जापान तक अपनी तकनीकी पहचान बना रहा है। महज 11 महीने पुराने मिराक एयरोस्पेस के काउंटर ड्रोन सिस्टम ने जापान की तीन कंपनियों का ध्यान खींचा है। इन कंपनियों ने स्टार्टअप के साथ काम करने में रुचि दिखाई है और जापान की जरूरतों के अनुसार ड्रोन विकसित करने को लेकर शुरुआती बातचीत भी हुई है।
हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल जापान गया था। इसमें देशभर से 71 स्टार्टअप चुने गए थे। मध्य प्रदेश से मिराक एयरोस्पेस एकमात्र स्टार्टअप था। इसके फाउंडर गौरव सिंह हैं।
गौरव ने ऐसे काउंटर ड्रोन विकसित किए हैं, जो हवा में ही दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं। इनमें से कुछ सिस्टम लक्ष्य आधारित कार्रवाई के लिए भी विकसित किए गए हैं। ड्रोन भारतीय सेना को उपलब्ध कराए गए हैं, जहां उनकी ट्रायल और टेस्टिंग की जा रही है। गौरव ने इस तकनीक के लिए पेटेंट भी फाइल किया है।
गौरव सिंह के अनुसार, आपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन आधारित खतरों से निपटने में महंगी तकनीकों के उपयोग ने उन्हें कम लागत वाला समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया। रूस और इजराइल सहित अन्य देशों की निर्माण एजेंसियों में काम करने के करीब 15 वर्षों के अनुभव के आधार पर उन्होंने आठ से नौ महीने के शोध के बाद यह तकनीक विकसित की।
पहला ड्रोन (रफ्तार 300 किमी प्रति घंटा)
दुश्मन के ड्रोन को हवा में ध्वस्त करने की क्षमता रखता है। यह अपने साथ विस्फोटक ले जाने में भी सक्षम है। इसे मैन्युअली भी आपरेट किया जा सकता है। यानी सेना अपने टारगेट सेट कर हमले कर सकती है। इस ड्रोन को एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है।
हवाई जहाज के आकार का है। यह आटोमेटिक दुश्मन के क्षेत्र को टारगेट कर ध्वस्त कर सकता है। इसका उपयोग सिर्फ एक बार ही किया जा सकता है। इन ड्रोन और बेहतर और प्रभावी बनाने के लिए रिसर्च की जा रही है।
गौरव के अनुसार, जापान की तीन कंपनियों के साथ फंडिंग और निर्माण को लेकर प्रारंभिक चरण की बातचीत हुई है। प्रस्तावित सहयोग में जापानी कंपनियों की ओर से निवेश के साथ तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराने की संभावना पर भी चर्चा हुई है। मिराक एयरोस्पेस जापान की भौगोलिक और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार ड्रोन विकसित कर वहां आपूर्ति करने की दिशा में काम कर सकता है। इस पर आगे की चर्चा प्रस्तावित है।
काउंटर ड्रोन सिस्टम का उपयोग अनजान या संभावित खतरनाक ड्रोन की पहचान और उससे सुरक्षा के लिए किया जाता है। रडार, कैमरा और अन्य सेंसर की मदद से यह आसमान में ड्रोन की गतिविधियों का पता लगा सकता है। खतरे की स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देकर ड्रोन को रोकने या निष्क्रिय करने की कार्रवाई की जा सकती है।
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