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आईआईटी इंदौर ने खोला एआई के ‘ब्लैक बॉक्स’ का राज, पता लगाया कैसे सीखती है मशीन

प्रो. सारिका जालान के नेतृत्व में हुए शोध में संकेत मिले हैं कि एआई सिर्फ पुराने डेटा के पैटर्न को याद नहीं करती, बल्कि जटिल प्रणालियों के पीछे काम कर...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 09 Sep 2026 10:55:42 AM (IST)Updated Date: Wed, 09 Sep 2026 11:20:25 AM (IST)
आईआईटी इंदौर ने खोला एआई के ‘ब्लैक बॉक्स’ का राज, पता लगाया कैसे सीखती है मशीन
आईआईटी इंदौर की फाइल फोटो।

HighLights

  1. एआई ऐसे बदलावों से पहले दिखाई देने वाले बेहद सूक्ष्म संकेतों को पहचान सकती है
  2. एआई इन संकेतों को केवल इसलिए नहीं पकड़ रही थी कि उसने वैसा कोई उदाहरण पहले देखा था
  3. आईआईटी इंदौर की यही खोज एआई के ‘ब्लैक बाक्स’ की पहेली को समझने में अहम है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) हमारे जीवन का हिस्सा बनती जा रही है, लेकिन एक बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर एआइ किसी निष्कर्ष तक पहुंचती कैसे है? इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है।

प्रो. सारिका जालान के नेतृत्व में हुए शोध में संकेत मिले हैं कि एआई सिर्फ पुराने डेटा के पैटर्न को याद नहीं करती, बल्कि जटिल प्रणालियों के पीछे काम करने वाले मूलभूत नियमों को भी सीख सकती है।

शोधार्थियों ने ‘रिजर्वायर कंप्यूटिंग’ नाम की एआइ तकनीक का अध्ययन किया। यह ऐसी मशीन लर्निंग तकनीक है, जिसमें सिस्टम समय के साथ बदलते डेटा को समझकर उसके आगे के व्यवहार का अनुमान लगाने की कोशिश करता है। शोध में ‘क्राइसिस’ या ‘टिपिंग पाइंट’ जैसी स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।


प्रकृति और समाज की कई प्रणालियां लंबे समय तक अस्थिर या अनिश्चित तरीके से चलती रहती हैं और फिर अचानक एक बड़ी अवस्था-परिवर्तन की स्थिति में पहुंच जाती हैं। उदाहरण के तौर पर कोई पर्यावरणीय तंत्र अचानक असंतुलित हो सकता है या किसी जटिल प्रणाली का व्यवहार तेजी से बदल सकता है।

जवाब कैसे दिया, यह पता लगा

वैज्ञानिकों ने पाया कि एआई ऐसे बदलावों से पहले दिखाई देने वाले बेहद सूक्ष्म संकेतों को पहचान सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि एआई इन संकेतों को केवल इसलिए नहीं पकड़ रही थी कि उसने वैसा कोई उदाहरण पहले देखा था। उसके मॉडल में दिखाई देने वाले आंकड़े वास्तविक भौतिक प्रणालियों में संकट से पहले होने वाले बदलावों से बेहद करीब से मेल खाते पाए गए। यही खोज एआई के ‘ब्लैक बॉक्स’ की पहेली को समझने में अहम है।

अब तक एआई के बारे में अक्सर कहा जाता रहा है कि वह सही जवाब तो दे देती है, लेकिन यह स्पष्ट करना मुश्किल होता है कि उसने वह जवाब कैसे निकाला। आईआईटी इंदौर के शोध से एआई के निर्णयों के पीछे छिपे वैज्ञानिक नियमों को समझना संभव हो सकता है।

निदेशक प्रो. सुहास जोशी ने इसे अधिक विश्वसनीय और व्याख्यायोग्य एआई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। वहीं प्रो. सारिका जालान के मुताबिक कैओस थ्योरी और गैर-रेखीय गतिकी को आधुनिक एआई से जोड़ने से भविष्य में अधिक सक्षम, पूर्वानुमेय और नियंत्रित एआई विकसित करने की राह खुल सकती है।

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