
नईदुनिया न्यूज नेटवर्क, वाराणसी। भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग इन दिनों अपने वाराणसी दौरे को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने काशी की प्रसिद्ध ‘सुबह-ए-बनारस’ और दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती के अनुभव को सोशल मीडिया मंच X पर साझा किया, जिसने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।
राजदूत ने अपने पोस्ट में गंगा तट के आध्यात्मिक माहौल का सजीव चित्रण किया। उन्होंने सूर्योदय के समय गंगा नदी के दृश्य को याद करते हुए लिखा कि धुंध के बीच उगता सूरज, धीरे-धीरे बहती नाव और जागते घाट एक अद्भुत अनुभूति प्रदान करते हैं।
चीन के राजदूत ने भारत और चीन के सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगा और यांग्त्जी जैसी महान नदियों ने दोनों सभ्यताओं को अलग-अलग ढंग से आकार दिया है, लेकिन दोनों ही श्रद्धा, निरंतरता और सामुदायिक भावना की साझा सच्चाई की ओर ले जाती हैं।
Sunrise over the Ganges, Varanasi. 🌄
A boat drifts. The sun rises slow through the haze. The ghats awaken.
China and India both grew up beside great rivers — the Ganges and the Yangtze shaped us differently, yet pointed us toward the same truths: reverence, continuity,… pic.twitter.com/jo5ve9l22h
— Xu Feihong (@China_Amb_India) May 5, 2026
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इससे पहले, जू फेइहोंग ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शामिल होकर उसके भव्य आयोजन की सराहना की थी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, मंत्रोच्चार, दीपों की रोशनी और गंगा की पवित्र धारा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके अनुसार, यह अनुभव भारत और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं के बीच एक अदृश्य सांस्कृतिक सेतु का एहसास कराता है।
राजदूत ने अपने वाराणसी प्रवास के दौरान सारनाथ का भी उल्लेख किया और उसे भारत-चीन के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। सोशल मीडिया पर उनके इन पोस्ट्स पर लोगों की विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
Witnessing the Ganga Aarti at Dashashwamedh Ghat, Varanasi. 🔥
Thousands gathered — fire, flowers, chanting, the sacred river.
Standing here, I feel what connects us across the Himalayas: two of the world's oldest civilizations, still alive and still burning bright.🇨🇳🤝🇮🇳… pic.twitter.com/WI4vzCqdfk
— Xu Feihong (@China_Amb_India) May 4, 2026
कई यूजर्स ने इसे भारत-चीन के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि कुछ ने धार्मिक स्थलों की कूटनीतिक भूमिका पर भी अपने विचार साझा किए।
राजदूत के इन अनुभवों ने एक बार फिर वाराणसी की आध्यात्मिक विरासत और उसकी वैश्विक आकर्षण क्षमता को उजागर किया है।