
डिजिटल डेस्क। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।
समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिरडी साईं संस्थान के प्रबंधन का लंबा अनुभव रखने वाले सुरेश हावड़े शामिल हैं। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद मंदिर प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है।
समिति के सदस्य सुरेश हावड़े करीब 10 वर्षों तक शिरडी साईं संस्थान की व्यवस्थाओं और संचालन से जुड़े रहे हैं। बड़े धार्मिक संस्थान के प्रशासन का उनका अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उनकी विशेषज्ञता के आधार पर ऐसे CEO का चयन किया जाएगा, जो मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बना सके।
तीन सदस्यीय समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी भी शामिल हैं। विष्णुकांत चतुर्वेदी वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूतपूर्व सैनिक सेवा परिषद के ऑल इंडिया चेयरमैन हैं। ट्रस्ट का मानना है कि प्रशासनिक, न्यायिक और प्रबंधन अनुभव का यह संतुलन योग्य CEO के चयन में मदद करेगा।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच कर रही SIT ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली में कई कमियां बताई थीं। रिपोर्ट में स्वतंत्र विशेषज्ञों से परामर्श लेकर पारदर्शी और कुशल व्यवस्था विकसित करने की सिफारिश की गई थी। इसी के बाद ट्रस्ट ने पहली बार CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया है।