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हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से यूपी के पंचायत प्रतिनिधियों में खलबली: प्रधानों के भविष्य पर संशय, अब 13 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पंचायत प्रतिनिधियों में हलचल तेज हो गई है।

By Digital DeskEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 04:12:02 PM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 04:12:02 PM (IST)
हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी से यूपी के पंचायत प्रतिनिधियों में खलबली: प्रधानों के भविष्य पर संशय, अब 13 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
यूपी के पंचायत प्रतिनिधियों में खलबली

HighLights

  1. प्रशासक बनाने के फैसले पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
  2. सरकार से पंचायत चुनाव की समय-सीमा पर मांगा जवाब
  3. अगली सुनवाई पर टिकी प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों की नजर

डिजिटल डेस्क। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पंचायत प्रतिनिधियों में हलचल तेज हो गई है। अदालत ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से पंचायत चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा पूछी है। इसके बाद प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सवाल

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या सरकार ने वर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाने का फैसला पर्याप्त कानूनी और संवैधानिक विचार-विमर्श के बाद लिया था। यदि यह निर्णय न्यायिक जांच में नहीं टिकता है तो पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, नई योजनाओं की स्वीकृति और प्रशासनिक फैसलों पर भी असर पड़ सकता है।


13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी नजर

अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। इस बीच पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ प्रधानों ने सरकार के फैसले को जनता के हित में बताया है और कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की तुलना में निर्वाचित प्रधान जनता के प्रति अधिक जवाबदेह होते हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि अब सरकार और न्यायालय के निर्णय के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

पहले भी चुनाव के लिए तैयार थे और अब भी तैयार

प्रधान संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे पहले भी चुनाव के लिए तैयार थे और अब भी तैयार हैं। वहीं अन्य प्रधानों का मानना है कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण और चुनावी तैयारियों में देरी के कारण सरकार को यह फैसला लेना पड़ा। फिलहाल पंचायत चुनाव और प्रशासक व्यवस्था को लेकर अंतिम स्थिति हाईकोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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