ज्ञानवापी विवाद: मध्यस्थता की कोशिश बेनतीजा, मंदिर और मस्जिद पक्ष ने समझौते से किया इनकार
ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी।
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 03:44:04 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 03:46:25 PM (IST)
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त
- दोनों पक्ष बोले- अदालत के फैसले का करेंगे इंतजार
- अदालत का जो भी अंतिम निर्णय होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा
डिजिटल डेस्क,वाराणसी। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े मामलों में मध्यस्थता के जरिए समाधान निकालने की कोशिश फिलहाल सफल नहीं हो सकी। मंगलवार को मध्यस्थता न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान मंदिर और मस्जिद, दोनों पक्षों ने आपसी समझौते से साफ इनकार कर दिया।
दोनों पक्षों ने कहा कि वे अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अब इस विवाद का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।
अदालत का जो भी अंतिम निर्णय होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा
मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान चार अलग-अलग पत्रावलियों पर सुनवाई हुई, जिनमें संबंधित सभी पक्षकार और उनके अधिवक्ता मौजूद रहे। न्यायालय के समक्ष सभी ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह के समझौते के पक्ष में नहीं हैं। हालांकि दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि अदालत का जो भी अंतिम निर्णय होगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम
मंदिर पक्ष का कहना है कि ज्ञानवापी परिसर मूल रूप से प्राचीन मंदिर का हिस्सा है और वहां नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार मिलना चाहिए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र पाठक ने सुनवाई के बाद कहा कि परिसर के तलगृह में वर्तमान में भी पूजा जारी है और उनका पक्ष अपने धार्मिक अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
विवाद का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से हो
वहीं, मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के प्रतिनिधि और अधिवक्ता भी मध्यस्थता की सुनवाई में शामिल हुए। उन्होंने भी समझौते की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि विवाद का समाधान केवल न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होना चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
ज्ञानवापी परिसर को लेकर लंबे समय से न्यायालयों में कानूनी विवाद चल रहा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यहां आदि विश्वेश्वर मंदिर था, जिसे मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में ध्वस्त कर मस्जिद का निर्माण कराया गया। दूसरी ओर, मस्जिद पक्ष का कहना है कि यह संपत्ति वक्फ की है और यहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है।
साथ ही, वह पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 का हवाला देते हुए धार्मिक स्थल के स्वरूप में बदलाव का विरोध करता है।
सर्वे रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
जिला अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा परिसर का सर्वे भी कराया जा चुका है। सर्वे रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। फिलहाल इस विवाद से जुड़े विभिन्न मामले वाराणसी जिला अदालत, इलाहाबाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं।