यूपी में शिलापट्टों पर जनप्रतिनिधियों के नाम लिखना हुआ अनिवार्य, नियमों के पालन पर ही मिलेगी दूसरी किस्त
उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों के शिलापट्टों पर जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित किए जाने को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 15 Jun 2026 06:00:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 15 Jun 2026 06:00:49 PM (IST)
HighLights
- जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज करना होगा अनिवार्य
- शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों के लिए भी निर्देश
- शिकायतों के बाद सरकार द्वारा लिया गया फैसला
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने विकास कार्यों के शिलापट्टों पर जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित किए जाने को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। नगर विकास विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी विकास परियोजना की दूसरी किस्त तभी जारी की जाएगी, जब संबंधित नगरीय निकाय शिलापट्ट की प्रमाणित प्रति और उसकी फोटो शासन को उपलब्ध कराएगा।
नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, परियोजनाओं की अगली किस्त प्राप्त करने के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र के साथ शिलापट्ट एवं पट्टिका की फोटो जिलाधिकारी, नगर आयुक्त अथवा अधिशासी अधिकारी से प्रमाणित कराकर प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। शासन स्तर पर सत्यापन के बाद ही संबंधित निकाय को दूसरी किस्त की धनराशि जारी की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज करना होगा अनिवार्य
शासनादेश में कहा गया है कि नगर विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं तथा वित्त आयोगों से वित्तपोषित विकास कार्यों के शिलापट्टों पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित किए जाना अनिवार्य है।निर्देशों के मुताबिक शिलापट्टों पर मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, लोकसभा और राज्यसभा सांसद, महापौर, विधायक, नामित नोडल सदस्य तथा नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों के नाम निर्धारित क्रम और फॉन्ट आकार के अनुसार दर्ज किए जाएंगे।
शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों के लिए भी निर्देश
सरकार ने शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रमों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शासन ने कहा है कि सभी जनप्रतिनिधियों को निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार आमंत्रित किया जाए, ताकि उनकी उपेक्षा संबंधी शिकायतों से बचा जा सके।
शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
नगर विकास विभाग के अनुसार, कई नगरीय निकायों द्वारा पूर्व में जारी निर्देशों का समुचित पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके संबंध में शासन को लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसी को देखते हुए अब नियमों के अनुपालन को वित्तीय स्वीकृति और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, जनप्रतिनिधियों को उचित सम्मान मिलेगा और शिलापट्टों को लेकर होने वाले विवादों पर प्रभावी रोक लग सकेगी।