अच्छी खबर: यूपी में कैंसर इलाज का नया मॉडल, एलोपैथी, आयुर्वेद और योग का ‘ट्रिपल डोज’ लड़ेगा इस बीमारी से जंग
उत्तर प्रदेश में कैंसर के इलाज को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार जल्द ही एलोपैथी, आयुर्वेद और योग आधारित ‘इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी’ मॉडल शुर ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 28 May 2026 12:25:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 12:28:12 PM (IST)
फोटो प्रतीकात्मक है और एआई से बनाया गया है।HighLights
- कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम रहे
- प्राकृतिक चिकित्सा के अच्छे नतीजे देखने को मिले
- पहले चरण में आयुर्वेदिक दवाएं दी जाएंगी
संतोष शुक्ल, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कैंसर के इलाज को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार जल्द ही एलोपैथी, आयुर्वेद और योग आधारित ‘इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी’ मॉडल शुरू करने की तैयारी में है। इसकी शुरुआत लखनऊ स्थित कल्याण सिंह कैंसर सुपरस्पेशियलिटी सेंटर से इसी साल के अंत तक किए जाने की योजना है।
दरअसल, कैंसर मरीजों में आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपचार के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है।
कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम रहे
मुंबई के टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर के 45 वर्षीय अनुपम वर्मा को मुंह के कैंसर के इलाज के दौरान एलोपैथिक दवाओं के साथ आयुर्वेदिक उपचार भी दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर हुई और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम रहे।
प्राकृतिक चिकित्सा के अच्छे नतीजे देखने को मिले
इसी तरह हरियाणा के झज्जर स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट में भी प्राकृतिक चिकित्सा के अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं। इन अनुभवों के आधार पर यूपी सरकार अब प्रदेश में इंटीग्रेटेड कैंसर ट्रीटमेंट मॉडल लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैंसर, ट्रॉमा और आईसीयू सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है।
बैठक में तत्काल लागू करने के निर्देश दिए
14 मई को आयोजित राज्य कैंसर मिशन की बैठक में कैंसर टास्क फोर्स के अध्यक्ष डॉ. एमएलबी भट्ट ने प्रदेश में कैंसर की स्थिति और इलाज व्यवस्था पर प्रस्तुतीकरण दिया। इसके बाद कल्याण सिंह कैंसर सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल में इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी शुरू करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, जिसे मुख्यमंत्री ने 26 मई की समीक्षा बैठक में तत्काल लागू करने के निर्देश दिए।
पहले चरण में आयुर्वेदिक दवाएं दी जाएंगी
पहले चरण में मुंह, गर्भाशय ग्रीवा और स्तन कैंसर के मरीजों को सहायक उपचार के रूप में आयुर्वेदिक दवाएं दी जाएंगी। विशेषज्ञों के मुताबिक गिलोय, अश्वगंधा, हल्दी और लहसुन जैसी कई औषधीय वनस्पतियां कैंसर नियंत्रण में सहायक साबित हुई हैं।
75 जिलों के डे-केयर कैंसर सेंटरों को जोड़ने की योजना
सरकार की योजना दूसरे चरण में सभी 75 जिलों के डे-केयर कैंसर सेंटरों को भी इस मॉडल से जोड़ने की है। इसके लिए जिला अस्पतालों में तैनात आयुष चिकित्सकों को टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल और एम्स आयुर्वेद, नई दिल्ली से विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणन दिलाया जाएगा।
प्रमुख संस्थानों में इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी मॉडल पर हो रहा काम
वर्तमान में देश के कुछ प्रमुख संस्थानों जैसे एम्स आयुर्वेद गोवा, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट झज्जर, टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल मुंबई, सीएमसी वेल्लोर और बीएचयू में इंटीग्रेटेड ऑन्कोलॉजी मॉडल पर काम किया जा रहा है।