यूपी में अब नहीं कटेगी बिजली: ट्रांसफार्मर डैमेज रेट में 80% गिरावट, ‘ट्रिपिंग-फ्री’ मॉडल की ओर बढ़ा राज्य
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 05 May 2026 03:00:16 PM (IST)Updated Date: Tue, 05 May 2026 03:01:39 PM (IST)
HighLights
- अंतिम छोर तक पहुंची बिजली
- शहर जैसा बिजली सिस्टम, गांवों तक
- मजबूत हुआ बुनियादी ढांचा
नईदुनिया न्यूज नेटवर्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले नौ वर्षों में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने बिजली संकट और अनियमित आपूर्ति की छवि से निकलकर मजबूत और विश्वसनीय पावर सिस्टम की दिशा में तेज प्रगति की है।
कभी ट्रिपिंग और कटौती के लिए चर्चित रहा प्रदेश अब 31,000 मेगावाट की पीक डिमांड को प्रभावी ढंग से संभालने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो गया है।
अंतिम छोर तक पहुंची बिजली
सरकार का फोकस केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वितरण नेटवर्क को मजबूत कर हर घर तक बिजली पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
मजरों में रोशनी: 2017 तक जहां करीब 1.28 लाख मजरों में बिजली थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 3 लाख के पार पहुंच गई है। छोटे-छोटे मजरों (जहां केवल 5 घर हैं) को भी मुख्य ग्रिड से जोड़ा जा रहा है।
रिकॉर्ड कनेक्शन: प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 1.80 करोड़ से बढ़कर 3.72 करोड़ हो गई है। ‘झटपट पोर्टल’ के जरिए नए कनेक्शन की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनी है।
शहर जैसा बिजली सिस्टम, गांवों तक
- बिजली आपूर्ति में असमानता खत्म करने के लिए समान वितरण नीति लागू की गई है।
- शहरी क्षेत्र: 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति
- ग्रामीण क्षेत्र: 18 से 22 घंटे तक सुनिश्चित बिजली
मजबूत हुआ बुनियादी ढांचा
पिछले कुछ वर्षों में बिजली ढांचे में बड़े पैमाने पर सुधार किए गए हैं। 30 लाख से अधिक बिजली खंभे बदले गए हैं।लाखों ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड किया गया है। यही कारण है कि 2025-26 में ट्रांसफार्मर डैमेज रेट में लगभग 80% की कमी दर्ज की गई है।
इन सुधारों का सीधा असर यह हुआ है कि बिजली आपूर्ति अब पहले की तुलना में अधिक स्थिर और ‘ट्रिपिंग-फ्री’ हो रही है।
स्मार्ट तकनीक से पारदर्शिता
बिजली चोरी रोकने और राजस्व प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए स्मार्ट तकनीक अपनाई गई है। करीब 84 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। 95% फीडर मीटरिंग पूरी हो गई है। कनेक्टेड लोड में 80% वृद्धि की गई, जो औद्योगिक और घरेलू गतिविधियों में तेजी का संकेत है।
उत्तर प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र अब तेजी से आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। उत्पादन, वितरण और प्रबंधन तीनों स्तरों पर हुए सुधारों ने राज्य को ‘पावर सरप्लस’ और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति वाले मॉडल की दिशा में स्थापित किया है।