UP में गर्मी में नहीं होगी बत्ती गुल, 34,000 MW बिजली का हुआ इंतजाम, शुरू होंगी नई इकाइयां
सरकार 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत, ऊर्जा विभाग ने इस साल गर्मी के मौसम में होने वाली रिकॉर्ड तोड़ मांग को पूरा करने के लिए 34,000 मेगावाट बिजली की उपलब ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 18 Apr 2026 06:05:44 PM (IST)Updated Date: Sat, 18 Apr 2026 06:05:44 PM (IST)
यूपी में भीषण गर्मी में नहीं होगा पावर कट। (AI से जेनरेट की गई इमेज)HighLights
- यूपी में भीषण गर्मी में नहीं होगा पावर कट
- 34,000 MW बिजली का बैकअप तैयार
- 30 अप्रैल तक शुरू होंगी नई इकाइयां
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में पारा चढ़ने के साथ ही योगी सरकार ने बिजली संकट से निपटने के लिए अभूतपूर्व तैयारी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत, ऊर्जा विभाग ने इस साल गर्मी के मौसम में होने वाली रिकॉर्ड तोड़ मांग को पूरा करने के लिए 34,000 मेगावाट बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है भीषण गर्मी के दौरान जनता को अंधेरे और कटौती से पूरी तरह मुक्त रखना।
जून में बनेगी चुनौती
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अनुमान के अनुसार, इस साल जून में बिजली की पीक डिमांड 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर होगा। इस चुनौती को भांपते हुए विभाग ने रणनीतिक कदम उठाए हैं। ओबरा, जवाहरपुर और पनकी जैसे प्रमुख थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स की नई यूनिट्स को ग्रिड से जोड़ दिया गया है। विशेष रूप से घाटमपुर की तीसरी यूनिट के 30 अप्रैल तक चालू होने से प्रदेश के बिजली भंडार में बड़ी बढ़ोत्तरी होगी।
कैसे होगी निर्बाध सप्लाई?
बिजली की कमी न हो, इसके लिए विभाग ने तीन स्तरों पर योजना बनाई है:
- लॉन्ग टर्म टाई-अप: कुल मांग की लगभग 80 प्रतिशत आपूर्ति पहले से तय एमओयू के जरिए की जाएगी।
- बिजली एक्सचेंज: जरूरत पड़ने पर IEX और HPX जैसे प्लेटफॉर्म से तत्काल बिजली खरीदी जाएगी।
- पावर बैंकिंग: उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों के साथ 4,663 मिलियन यूनिट की बैंकिंग व्यवस्था की है, जो आपात स्थिति में 'सुरक्षा कवच' का काम करेगी।
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फीडर स्तर पर निगरानी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक कहा है कि उपभोक्ताओं को होने वाली किसी भी तरह की परेशानी सीधे जिम्मेदारी तय करेगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद:
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान आपूर्ति के लिए फीडर स्तर पर डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू की गई है।
- ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को सुधारा गया है ताकि ओवरलोडिंग की समस्या न आए।
- लाइन लॉस कम करने और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए पूरे सिस्टम को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।