
डिजिटल डेस्क, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। उनके स्थान पर वरिष्ठ ट्रस्टी कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक के दौरान ट्रस्ट ने मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान और रामलला के चढ़ावे का विस्तृत वित्तीय लेखा-जोखा भी सार्वजनिक किया।
ट्रस्ट की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, निधि समर्पण अभियान, श्रद्धालुओं के सहयोग और अन्य स्रोतों से अब तक कुल 3264 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें से 2370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।
वहीं, ट्रस्ट की स्थापना से लेकर 31 मार्च तक रामलला के चढ़ावे के रूप में 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इनमें से 391 करोड़ रुपये मंदिर के संचालन, रखरखाव और प्रशासनिक कार्यों पर खर्च किए गए, जबकि शेष राशि ट्रस्ट के बैंक खातों में सुरक्षित रखी गई है।
ट्रस्ट ने बताया कि नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं ने 2926 वस्तुगत भेंट भी अर्पित की हैं। इन सभी का तिथि-वार रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है। हर वर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा इनका भौतिक सत्यापन कराया जाता है। कोई भी श्रद्धालु आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट से संपर्क कर अपनी भेंट का सत्यापन करा सकता है।
बैठक में ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े को शामिल किया गया है। समिति अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपेगी, जिसके आधार पर नियुक्ति की जाएगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कुछ कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी आय से अधिक नकद जमा और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी ने चोरी की रकम रिश्तेदारों के खातों में स्थानांतरित किए जाने और उससे संपत्ति अर्जित करने की आशंका जताते हुए विस्तृत आर्थिक जांच की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दान गणना कक्ष में लागू की जाने वाली कई महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से लागू नहीं थीं। जेब रहित वर्दी, निजी सामान पर प्रतिबंध, तलाशी और बायोमीट्रिक उपस्थिति जैसी व्यवस्थाओं का पालन नहीं किया गया। ट्रस्ट और बैंक के बीच तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का भी पूरी तरह अनुपालन नहीं हुआ, जिससे चोरी की घटनाओं की आशंका बढ़ी।
जांच में गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। उन पर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू न करने और गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने के दावों की जांच में पुष्टि नहीं हुई। जांच टीम को सभी वस्तुएं रिकॉर्ड के अनुरूप सुरक्षित मिलीं।
SIT ने यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व ऑडिट रिपोर्ट में सीसीटीवी फुटेज 180 दिनों तक सुरक्षित रखने और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की सिफारिशें की गई थीं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार 20 सितंबर 2024 और 6 फरवरी 2025 को ट्रस्ट और बैंक के बीच जारी संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा में भी कमी पाई गई।
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