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शिक्षक से शुरू हुआ सफर फिर राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकारों में होने लगी गिनती और अब दिया इस्तीफा, जानें कौन हैं चंपत राय?

राम मंदिर के चढ़ावा गबन मामले (Ram Mandir Offering Theft Case) में जांच आगे बढ़ने के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक घटना...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: manoj dubey
Publish Date: Fri, 26 Jun 2026 02:26:32 PM (IST)Updated Date: Fri, 26 Jun 2026 04:15:19 PM (IST)
शिक्षक से शुरू हुआ सफर फिर राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकारों में होने लगी गिनती और अब दिया इस्तीफा, जानें कौन हैं चंपत राय?
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया।

HighLights

  1. आठ लोगों पर दर्ज हुई है एफआईआर
  2. नृपेंद्र मिश्र ने इनके इस्तीफे की पुष्टि की
  3. जांच पर टिकी सभी की निगाहें

डिजिटल डेस्क, अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावा गबन मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

यह फैसला उस समय आया है जब विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, इस्तीफे के कारणों को लेकर ट्रस्ट की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


आठ लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन मामले में करीब 18 दिन की जांच के बाद ट्रस्ट ने गुरुवार को पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। प्राथमिकी में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के चालक टिन्नू यादव सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है।

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कौन हैं चंपत राय, शिक्षक से राम मंदिर आंदोलन के रणनीतिकार तक

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से आने वाले चंपत राय का प्रारंभिक जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बिजनौर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में रसायन विज्ञान के शिक्षक के रूप में की थी, लेकिन 1980 के दशक में अध्यापन छोड़कर संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।

चंपत राय के पास थी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

मौजूदा विवाद के बीच सबसे अधिक चर्चा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की हो रही है। आज इस्तीफा देने से पहले वह श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष भी थे। सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के बाद फरवरी 2020 में केंद्र सरकार ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था। 15 सदस्यीय इस ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण और उसके संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन, निर्माण परियोजना की निगरानी, दान और चढ़ावे के प्रबंधन, विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय और आधिकारिक संवाद जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मुख्य रूप से चंपत राय के पास रही हैं। इसी वजह से राम मंदिर से जुड़े किसी भी बड़े फैसले, घोषणा या विवाद के दौरान वह ट्रस्ट का सबसे प्रमुख सार्वजनिक चेहरा बनकर सामने आते रहे हैं।

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते रहे

बाद में उन्हें विश्व हिंदू परिषद में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गईं। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह उन प्रमुख लोगों में शामिल रहे, जिन्होंने संगठनात्मक रणनीति तैयार करने, दस्तावेज जुटाने, कानूनी पक्ष को मजबूत करने और आंदोलन से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय का काम किया। संगठन से जुड़े लोगों के मुताबिक, वह लंबे समय तक राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते रहे और विहिप के शीर्ष नेतृत्व में उनकी मजबूत पकड़ रही।