राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: ट्रस्ट की आपात बैठक में बड़ा फैसला, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार
श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी (Ram Mandir offering theft case) के मामले को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 06 Jul 2026 07:23:06 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Jul 2026 07:23:06 PM (IST)
ट्रस्टी डॉ.अनिल कुमार मिश्रा और महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार।HighLights
- कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई
- ट्रस्ट की आपात बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की
- ट्रस्टी या पदाधिकारी इस्तीफा देता है, तो स्वतः स्वीकार माना जाता है
डिजिटल डेस्क, अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी (Ram Mandir offering theft case) के मामले को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट की आपात बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ.अनिल कुमार मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया।
इसके साथ ही कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ट्रस्ट की आपात बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की।
इस्तीफा वह स्वतः स्वीकार माना जाता है
बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई, जब राम मंदिर परिसर के दान-पात्रों से चढ़ावा चोरी के मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि ट्रस्ट के संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई ट्रस्टी या पदाधिकारी अपना इस्तीफा देता है, तो वह तत्काल प्रभाव से स्वतः स्वीकार माना जाता है।
गोविंद देव गिरि ने बताया कि इसी नियम के तहत महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार मान्य माना गया।
गोपाल राव को बैठक कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया
बैठक के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा का विषय रहा। जानकारी के अनुसार, बिना आमंत्रण ट्रस्ट कार्यालय पहुंचे गोपाल राव को बैठक कक्ष में प्रवेश नहीं दिया गया और उन्हें बाहर जाने के लिए कहा गया।
गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद से ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और प्रबंधन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में ट्रस्ट की यह बैठक और उसमें लिए गए फैसलों को विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।