• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • ए आई बूटकैंप
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • उत्तर प्रदेश
  • लखनऊ

यूपी में 4.85 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर... 7,874 स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे, 313 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं

उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस सरकारी डेटा ने राज्य के सरकारी स्कूलों में संसाधनों और ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sat, 11 Jul 2026 02:58:01 PM (IST)Updated Date: Sat, 11 Jul 2026 02:58:01 PM (IST)
यूपी में 4.85 लाख बच्चों का भविष्य दांव पर... 7,874 स्कूल सिर्फ एक टीचर के भरोसे, 313 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं
यूपी समेत देश के 12 राज्यों में सरकारी संसाधनों की बर्बादी। (AI Generated)

HighLights

  1. यूपी समेत देश के 12 राज्यों में सरकारी संसाधनों की बर्बादी
  2. स्कूल ज्यादा पर बच्चे कम; देखें यू-डायस के ताजा आंकड़े
  3. विशेषज्ञों ने कहा- शिक्षकों के युक्तिकरण से ही सुधरेगी शिक्षा

डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस सरकारी डेटा ने राज्य के सरकारी स्कूलों में संसाधनों और शिक्षकों के आवंटन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में एक तरफ 313 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी बच्चे ने दाखिला नहीं लिया है, लेकिन वहां 177 शिक्षकों की तैनाती बरक़रार है। इसके ठीक उलट, राज्य के 7,874 स्कूल ऐसे हैं जहां पूरा विद्यालय सिर्फ एक शिक्षक के दम पर चल रहा है, जबकि इन एकल-शिक्षक स्कूलों में लगभग 4.85 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साक्षरता विभाग द्वारा जारी 'यू-डायस प्लस रिपोर्ट' (U-DISE+) के ताजा आंकड़ों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनौती केवल नए स्कूल खोलने या शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की नहीं है, बल्कि मौजूदा संसाधनों के सही और संतुलित वितरण की है।


आंकड़ों में यूपी की स्कूली शिक्षा

समग्र रूप से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के आंकड़े काफी संतोषजनक नजर आते हैं। प्रदेश में कुल 2,65,278 स्कूल, 4.27 करोड़ से अधिक छात्र और 16.42 लाख से ज्यादा शिक्षक मौजूद हैं। इस लिहाज से राज्य का छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 26 है, यानी औसतन 26 छात्रों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। वहीं, प्रत्येक स्कूल में औसत रूप से 6 शिक्षक और 161 छात्र नामांकित हैं। लेकिन जब जमीनी स्तर पर इन आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है, तो वितरण की भारी विसंगति खुलकर सामने आती है।

असंतुलन की श्रेणी में उत्तर प्रदेश

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश देश के उन 12 राज्यों में शुमार है जहाँ स्कूलों की संख्या तो ज्यादा है, लेकिन वहाँ छात्रों का दाखिला उस अनुपात में नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि बुनियादी ढांचे का पूरी क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहा है।

यूपी के अलावा इस सूची में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मेघालय जैसे राज्य शामिल हैं। इसके विपरीत महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में स्थिति अलग है; वहाँ स्कूलों की तुलना में छात्रों की संख्या का दबाव बहुत अधिक है।

यह भी पढ़ें- यूपी में 68500 शिक्षक भर्ती-2018 का रिजल्ट होगा संशोधित, OBC अभ्यर्थियों को मिलेगा 5% छूट का फायदा

युक्तिकरण है एकमात्र उपाय

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए ये आंकड़े एक चेतावनी की तरह हैं। विभाग को अब उन स्कूलों से शिक्षकों को हटाकर एकल-शिक्षक वाले स्कूलों में तैनात करना होगा जहां छात्र संख्या शून्य या नगण्य है। केवल कागजों पर शिक्षकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उनका तार्किक और समान वितरण सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।