यूपी विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ, राम मंदिर चढ़ावा और NEET पेपर लीक पर विपक्ष का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को विपक्ष के जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बीच हुई।
Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 04:59:37 PM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 05:01:00 PM (IST)
HighLights
- कुछ नए विधेयक भी सदन में लाए जाने की संभावना
- विधान परिषद में मथुरा-काशी पर गरमाई सियासत
- दानपेटी में चिल्लर भरकर विधानसभा पहुंचे सपा नेता
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को विपक्ष के जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बीच हुई। समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण और NEET पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस दौरान सपा कार्यकर्ता प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर दानपेटी में चिल्लर भरकर विधानसभा पहुंचे। सत्र के पहले दिन विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सदन ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ एवं प्रदेश के सबसे उम्रदराज विधायक आलमबदी के निधन पर शोक व्यक्त किया।
कुछ नए विधेयक भी सदन में लाए जाने की संभावना
शोक प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, विधान परिषद की कार्यवाही जारी रही। चार दिन तक चलने वाले इस मानसून सत्र के 6 अगस्त तक जारी रहने की संभावना है। सरकार इस दौरान पिछले सत्र के बाद जारी किए गए नौ अध्यादेशों के स्थान पर प्रतिस्थानी विधेयक पेश कर सकती है। इसके अलावा कुछ नए विधेयक भी सदन में लाए जाने की संभावना है।
विधान परिषद में मथुरा-काशी पर गरमाई सियासत
विधान परिषद में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मथुरा और काशी में भी मंदिर बनकर रहेगा। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, 100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। इस टिप्पणी पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा, आप चढ़ावा चोरी करके हज को चले। इसके बाद सदन में कुछ देर तक तीखी नोकझोंक का माहौल बना रहा।
सपा का आरोप- मंदिर ट्रस्ट के गठन से ही अनियमितताओं की शुरुआत
सपा विधायक लाल बिहारी यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सरकार और मंदिर ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के गठन के समय आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी गई, जिससे एक ही विचारधारा का वर्चस्व स्थापित हो गया। उनका दावा था कि ट्रस्ट के गठन के साथ ही भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की नींव पड़ गई, जिसकी जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए।
मानसून सत्र के आगामी दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। साथ ही सरकार द्वारा लाए जाने वाले विधेयकों और अध्यादेशों पर भी सदन में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।