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यूपी का एक ऐसा गांव... जहां गोबर ने पलटी लोगों की किस्मत, लाखों की बचत और 24 लोगों को रोजगार

लगभग तीन वर्ष पूर्व यहां की गोशाला में ₹40 लाख के निवेश से 85 घन मीटर क्षमता वाला एक बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया था। आज यह संयंत्र न केवल गांव को ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 03:24:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 03:24:34 PM (IST)
यूपी का एक ऐसा गांव... जहां गोबर ने पलटी लोगों की किस्मत, लाखों की बचत और 24 लोगों को रोजगार
यूपी का एक ऐसा गांव... जहां गोबर ने पलटी लोगों की किस्मत

HighLights

  1. किरा गांव में बायोगैस प्लांट से बदली विकास और बिजली की तस्वीर
  2. 24 केयरटेकरों को मिला रोजगार और मुफ्त एलपीजी गैस की सुविधा
  3. जैविक खाद और किफ़ायती तेल पेराई से आत्मनिर्भर बन रहा गांव

एजेंसी, रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित शाहबाद विकास खंड की किरा ग्राम पंचायत आज अपने अनोखे और टिकाऊ मॉडल के लिए एक उदाहरण बन चुकी है। लगभग तीन वर्ष पूर्व यहां की गोशाला में ₹40 लाख के निवेश से 85 घन मीटर क्षमता वाला एक बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया था। आज यह संयंत्र न केवल गांव को बिजली और जैविक खाद उपलब्ध करा रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आजीविका का सशक्त जरिया भी बन चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, इस प्लांट के जरिए अब तक करीब ढाई लाख रुपये मूल्य की बिजली की बचत की जा चुकी है।

गोबर से ईंधन और मुफ़्त रसोई गैस की सुविधा

किरा गोशाला में वर्तमान समय में 816 गोवंश की देखभाल की जा रही है। इस बायोगैस संयंत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर दिन लगभग 2,125 किलोग्राम गोबर की खपत होती है। इससे प्रतिदिन करीब 51 किलोग्राम बायो-गैस बनती है, जिसका उपयोग जनरेटर चलाने में किया जाता है। उत्पन्न बिजली से गोशाला की चारा कटाई मशीन, ट्यूबवेल और गांव की स्ट्रीट लाइटें चलाई जाती हैं।


इसके अतिरिक्त, परिसर में तैनात 24 केयरटेकरों को भोजन बनाने के लिए यही गैस उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें पारंपरिक चूल्हे के जहरीले धुएं से मुक्ति मिली है और उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।

जैविक खाद से आय और सस्ती तेल पेराई मशीन की सुविधा

बायोगैस निर्माण प्रक्रिया के बाद हर महीने लगभग 5 से 6 ट्रॉली उच्च गुणवत्ता वाली जैविक स्लरी (खाद) निकलती है। इसे ₹2,000 प्रति ट्रॉली की किफायती दर पर स्थानीय किसानों को बेचा जाता है। इस खाद की बिक्री से अब तक ₹53,800 की धनराशि गोशाला के खाते में जमा हो चुकी है।

ग्राम प्रधान नीतू की पहल पर गांव में एक 'कोल्ड प्रेस ऑयल स्पेलर' (सरसों पेराई मशीन) भी स्थापित की गई है, जो इसी बायोगैस बिजली से संचालित होती है। इसके माध्यम से ग्रामीण मात्र ₹3 प्रति लीटर के मामूली शुल्क पर शुद्ध सरसों का तेल निकलवा पा रहे हैं, जबकि बाज़ार में इसके लिए ₹5 से ₹6 प्रति लीटर तक चुकाने पड़ते हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम: गोबर से बनेंगे गमले

उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशांक नाथ ने बताया कि इस नवाचार ने गांव के 24 परिवारों को सीधे तौर पर रोज़गार प्रदान किया है। ये कर्मचारी गोबर एकत्र करने, प्लांट के रखरखाव, खाद प्रबंधन और तेल पेराई जैसे कार्यों से जुड़े हैं।

उन्होंने आगे बताया कि आगामी दिनों में गोशाला में गोबर से पर्यावरण-अनुकूल गमले बनाने की मशीन भी लगाई जाएगी, जिससे गोबर का व्यावसायिक उपयोग और अधिक बढ़ जाएगा तथा गोशाला पूरी तरह आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर होगी।

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