
डिजिटल डेस्क। बिजली आपूर्ति और खपत के मामले में उत्तर प्रदेश वर्तमान में देश के शीर्ष राज्यों की सूची में दूसरे स्थान पर काबिज है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1.65 लाख मिलियन यूनिट (MU) की आपूर्ति के साथ यूपी केवल महाराष्ट्र से पीछे है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य में दशकों से चली आ रही 'रोस्टर व्यवस्था' को समाप्त कर दिया जाए, तो उत्तर प्रदेश बिजली खपत के मामले में देश का सिरमौर बन सकता है।
उत्तर प्रदेश में फिलहाल बिजली वितरण के लिए अलग-अलग मानक तय हैं। जहां महानगरों, जिला मुख्यालयों और औद्योगिक क्षेत्रों को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिल रही है, वहीं ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के लिए स्थिति भिन्न है:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि राज्य को पूरी तरह 'रोस्टर मुक्त' घोषित किया जाए। परिषद के अध्यक्ष और ऊर्जा की सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश वर्मा ने 'उपभोक्ता अधिकार नियम 2020' का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के अधिकांश राज्यों में अब रोस्टर व्यवस्था खत्म हो चुकी है।
जब होली जैसे त्योहारों पर प्रदेश के हर गांव और कस्बे को 48 घंटे निर्बाध बिजली दी जा सकती है, तो सामान्य दिनों (गर्मी या सर्दी) में पूरे प्रदेश को 24 घंटे बिजली क्यों नहीं मिल सकती?- अवधेश वर्मा, परिषद के अध्यक्ष और ऊर्जा की सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य
वित्तीय वर्ष 2024-25 के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि बिजली की मांग और आपूर्ति के मामले में देश के शीर्ष 5 राज्य इस प्रकार हैं:
दिलचस्प बात यह है कि महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में रोस्टर व्यवस्था लागू नहीं है। परिषद का दावा है कि यदि उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों को भी 24 घंटे बिजली मिलने लगे, तो राज्य की कुल ऊर्जा खपत में भारी उछाल आएगा, जो इसे महाराष्ट्र से आगे ले जाएगा।
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बढ़ती तपिश को देखते हुए उपभोक्ता परिषद ने सरकार से अपील की है कि ब्रेकडाउन की समस्याओं को तत्काल ठीक करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। मांग की गई है कि इस गर्मी में किसी भी श्रेणी के उपभोक्ता को कटौती का सामना न करना पड़े और 'वन स्टेट, वन पावर' के विजन को धरातल पर उतारा जाए।
