
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की देश की शीर्ष अदालत (सु्रीम कोर्ट) की कोशिशें सिरे चढ़ती नहीं दिख रही हैं। अदालत द्वारा विशेष अनुमति याचिका पर समझौते की गुंजाइश तलाशने के निर्देशों के बावजूद, विवाद से जुड़े दोनों ही पक्ष सुलह-समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। जहां हिंदू पक्ष कानूनी लड़ाई के जरिए पूरी भूमि पर दावा ठोक रहा है, वहीं ईदगाह कमेटी ने भी इस बातचीत की प्रक्रिया से दूरी बना ली है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दोनों पक्षों में सुलह का रास्ता निकालने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी सिलसिले में 4 जुलाई को एक बैठक भी आहूत की गई थी, लेकिन शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी का कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ। कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने लिखित तौर पर यह साफ कर दिया कि इस मामले को लोक अदालत की तर्ज पर सुलझाने के लिए सूचीबद्ध न किया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आगामी समझौता वार्ता के लिए 21, 22 और 23 अगस्त की तारीखें पहले से मुकर्रर कर रखी हैं।
मुकदमे से जुड़े विभिन्न हिंदू याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत की इस पहल पर अपना कड़ा रुख जाहिर किया है...
दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने इस नई पहल पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के बीच साल 1968 में ही एक लिखित समझौता हो चुका है, जिसे कोर्ट की डिक्री भी मिल चुकी है। ऐसे में अब दोबारा किसी नई सुलह-वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता और उन्हें यह प्रक्रिया कतई मंजूर नहीं है।
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