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मथुरा जन्मभूमि विवाद पर नहीं हो पाई सुलह... सुप्रीम कोर्ट के प्रयास के बाद पक्षकार ने कहा - पूरी जमीन लेंगे

अदालत द्वारा विशेष अनुमति याचिका पर समझौते की गुंजाइश तलाशने के निर्देशों के बावजूद, विवाद से जुड़े दोनों ही पक्ष सुलह-समझौते के लिए तैयार नहीं हैं।

By Digital DeskEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 04:01:10 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 04:01:10 PM (IST)
मथुरा जन्मभूमि विवाद पर नहीं हो पाई सुलह... सुप्रीम कोर्ट के प्रयास के बाद पक्षकार ने कहा - पूरी जमीन लेंगे
मथुरा जन्मभूमि विवाद पर नहीं हो पाई सुलह

HighLights

  1. मथुरा जन्मभूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट की सुलह की कोशिशें हुईं नाकाम
  2. दोनों पक्षों का इनकार, कानूनी लड़ाई के जरिए जमीन लेने पर अड़ा हिंदू पक्ष
  3. ईदगाह कमेटी की दलील: 1968 में हुए समझौते के बाद अब बातचीत का तुक नहीं

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की देश की शीर्ष अदालत (सु्रीम कोर्ट) की कोशिशें सिरे चढ़ती नहीं दिख रही हैं। अदालत द्वारा विशेष अनुमति याचिका पर समझौते की गुंजाइश तलाशने के निर्देशों के बावजूद, विवाद से जुड़े दोनों ही पक्ष सुलह-समझौते के लिए तैयार नहीं हैं। जहां हिंदू पक्ष कानूनी लड़ाई के जरिए पूरी भूमि पर दावा ठोक रहा है, वहीं ईदगाह कमेटी ने भी इस बातचीत की प्रक्रिया से दूरी बना ली है।

कोर्ट के निर्देश पर बुलाई गई बैठक से ईदगाह पक्ष रहा नदारद

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दोनों पक्षों में सुलह का रास्ता निकालने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसी सिलसिले में 4 जुलाई को एक बैठक भी आहूत की गई थी, लेकिन शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी का कोई भी प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हुआ। कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने लिखित तौर पर यह साफ कर दिया कि इस मामले को लोक अदालत की तर्ज पर सुलझाने के लिए सूचीबद्ध न किया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आगामी समझौता वार्ता के लिए 21, 22 और 23 अगस्त की तारीखें पहले से मुकर्रर कर रखी हैं।


'पूरी जमीन लेकर रहेंगे' - हिंदू याचिकाकर्ताओं का रुख साफ

मुकदमे से जुड़े विभिन्न हिंदू याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत की इस पहल पर अपना कड़ा रुख जाहिर किया है...

  • अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि वे सुप्रीम कोर्ट की इस समझौता वार्ता का हिस्सा नहीं बनेंगी और न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़कर पूरी जमीन हासिल करेंगी।
  • अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वे अदालत के सम्मान में वार्ता में शामिल जरूर होंगे, लेकिन किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे; उनका लक्ष्य पूरी भूमि प्राप्त करना है।
  • महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि उन्हें पूरी जमीन चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी तक उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई आधिकारिक पत्र नहीं मिला है, लेकिन पत्र मिलने पर वे निश्चित तौर पर वार्ता में जाएंगे।

ईदगाह कमेटी की दलील: 1968 में हो चुका है अंतिम समझौता

दूसरी तरफ, मुस्लिम पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद ने इस नई पहल पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के बीच साल 1968 में ही एक लिखित समझौता हो चुका है, जिसे कोर्ट की डिक्री भी मिल चुकी है। ऐसे में अब दोबारा किसी नई सुलह-वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता और उन्हें यह प्रक्रिया कतई मंजूर नहीं है।

यह भी पढ़ें- ज्ञानवापी विवाद: मध्यस्थता की कोशिश बेनतीजा, मंदिर और मस्जिद पक्ष ने समझौते से किया इनकार