गाजियाबाद में 150 करोड़ की संपत्ति बनी खूनी विवाद का कारण, बेटे ने पिता को सात गोलियां मारकर उतारा मौत के घाट
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर थाना क्षेत्र के बुदाना गांव में पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद खूनी अंजाम तक पहुंच गया।
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 03:43:24 PM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 03:43:52 PM (IST)
आरोपित निखिल पिता के साथ।HighLights
- मोदीनगर के बुदाना गांव की वारदात
- संपत्ति अपने नाम कराने को लेकर चल रहा था विवाद
- 2018 में छोटे भाई पर भी कर चुका था जानलेवा हमला
डिजिटल डेस्क, गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मोदीनगर थाना क्षेत्र के बुदाना गांव में पारिवारिक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद खूनी अंजाम तक पहुंच गया। करीब 150 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने नाम कराने की जिद में बेटे ने कथित तौर पर अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या कर दी।
घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी हैं। पुलिस के अनुसार, मृतक हरिओम नेहरा के बेटे निखिल नेहरा का लंबे समय से संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार से विवाद चल रहा था।
चार गोलियां हरिओम के सिर, सीने और गले में लगीं
आरोप है कि बुधवार देर रात वह नशे की हालत में घर पहुंचा और पिता से संपत्ति अपने नाम कराने को लेकर बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि निखिल ने पिस्टल निकालकर हरिओम पर ताबड़तोड़ सात राउंड फायरिंग कर दी। इनमें से चार गोलियां हरिओम के सिर, सीने और गले में लगीं।
गोली चलने की आवाज सुनकर पत्नी मीनाक्षी और छोटा बेटा नीशू मौके पर पहुंचे और घायल हरिओम को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने मृतक की पत्नी की तहरीर पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
2018 में छोटे भाई पर भी किया था हमला
जांच में सामने आया है कि निखिल का हिंसक व्यवहार पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2018 में उसने अपने छोटे भाई नीशू पर भी गोली चला दी थी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। हालांकि उस समय उसकी जान बच गई थी और मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया था।
150 करोड़ की संपत्ति को लेकर था विवाद
परिजनों के मुताबिक, हरिओम नेहरा के पास पैतृक संपत्ति के रूप में करीब 75 बीघा जमीन, छह दुकानें और अन्य व्यावसायिक जमीन थी। भविष्य में विवाद से बचने के लिए उन्होंने मौखिक रूप से दोनों बेटों के बीच संपत्ति का बंटवारा कर दिया था। निखिल को 25 बीघा जमीन और दो दुकानें दी गई थीं, जबकि बाकी संपत्ति छोटे बेटे और स्वयं हरिओम के हिस्से में रखी गई थी।
बताया जा रहा है कि हरिओम ने कानूनी तौर पर किसी के नाम बैनामा नहीं किया था। निखिल पूरे परिवार की संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बना रहा था, जबकि हरिओम को आशंका थी कि ऐसा होने पर वह संपत्ति बेच सकता है।
नई जमीन को लेकर भी बढ़ा था विवाद
परिजनों के अनुसार, कुछ समय पहले हरिओम ने बुदाना रोड पर पांच बीघा जमीन खरीदी थी, जहां वह बैंक्वेट हॉल बनवाने की योजना बना रहे थे। वहीं निखिल उस जमीन पर कॉलोनी विकसित करना चाहता था। इसी मुद्दे को लेकर भी परिवार में लगातार तनाव बना हुआ था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।