
डिजिटल डेस्क, मेरठ। मेरठ-करनाल हाईवे (Meerut–Karnal Highway) के आबादी वाले हिस्सों में वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 किमी/घंटा तय कर दी गई है। हालांकि, बड़ी संख्या में वाहन चालकों को इस बदलाव की जानकारी नहीं है, जिसके चलते ई-चालान लगातार कट रहे हैं और लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
यातायात पुलिस का कहना है कि यह कदम दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। वहीं टोल प्रबंधन का दावा है कि सूचना देने के लिए सांकेतिक बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर ये बोर्ड क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं।
17 मई दोपहर करीब 1 बजे, हेमंत नामक चालक का ई-चालान जेवरी के पास 78 किमी/घंटा की रफ्तार पर काटा गया। हेमंत के अनुसार, हाईवे पर सामान्य गति सीमा 100 किमी/घंटा मानी जाती है, ऐसे में 78 किमी/घंटा पर चालान होना उनके लिए चौंकाने वाला था।
जांच में सामने आया कि पांच दिन पहले राजेश श्रीवास्तव (एसपी यातायात) ने इस मार्ग का निरीक्षण किया था। इसके बाद गांवों और आबादी क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्सों में गति 40–60 किमी/घंटा के बीच रखने के निर्देश दिए गए।
हाईवे के रखरखाव और पेट्रोलिंग की जिम्मेदारी दिनेश चंद्र अग्रवाल दिनेश चंद्रा अग्रवाल कंपनी को सौंपी गई है। मेंटेनेंस इंचार्ज बबलू यादव के अनुसार, दुर्घटना संभावित स्थानों पर संकेतक लगाए गए हैं, लेकिन कुछ बोर्ड हादसों के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए, जिन्हें दोबारा लगाया जाएगा।
भूनी टोल के असिस्टेंट मैनेजर अभिनव यादव का कहना है कि नियंत्रित गति से सड़क हादसों में कमी आएगी। उधर, एसपी यातायात का तर्क है कि दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे (Delhi–Dehradun Greenfield Expressway) शुरू होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है, जिससे दुर्घटनाएं भी बढ़ी हैं। इसी के मद्देनज़र मेरठ सीमा में आबादी वाले हिस्सों पर 60 किमी/घंटा की अधिकतम सीमा लागू की गई है।
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जब अधिकारियों से पूछा गया कि आम जनता को इस बदलाव की जानकारी कैसे दी गई, तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका। पुलिस का कहना है कि टोल कंपनी ने संकेतक लगाए हैं, जबकि जल्द ही स्पीड कैमरे लगाने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI)से चर्चा चल रही है।
फिलहाल, आबादी वाले हिस्सों में 60 किमी/घंटा से अधिक गति मिलने पर ई-चालान जारी किए जा रहे हैं और निगरानी बढ़ा दी गई है।