करीब एक साल बाद ईरान की जेल से रिहा हुए 10 भारतीय नाविक, पर्दे के पीछे से भारत ने ऐसे पलटी बाजी
ईरान में करीब एक साल से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। इन नाविकों को जुलाई 2025 में ईरान की समुद्री सीमा के भीतर ...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 27 May 2026 02:25:20 PM (IST)Updated Date: Wed, 27 May 2026 02:25:20 PM (IST)
ईरान में हिरासत में लिए गए 10 भारतीय नाविक रिहा (फाइल फोटो)HighLights
- शांत कूटनीति के जरिए भारत को मिली बड़ी कामयाबी
- ईरान से 10 भारतीय नाविकों की सुरक्षित रिहाई हुई है
- नाविकों को जल्द भारत वापस लाने के इंतजाम किए जा रहे हैं
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में करीब एक साल से हिरासत में रखे गए 10 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। भारत के नौवहन महानिदेशालय ने मंगलवार देर रात इसकी पुष्टि की। इन नाविकों को जुलाई 2025 में ईरान की समुद्री सीमा के भीतर एक ऑयल टैंकर से पकड़ा गया था। लगातार चली कूटनीतिक बातचीत के बाद सभी नाविकों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया है और उन्हें जल्द भारत वापस लाने के इंतजाम किए जा रहे हैं।
क्या था पूरा मामला?
नौवहन महानिदेशालय के अनुसार, एमवी हार्बर फीनिक्स नामक एक तेल उत्पाद टैंकर को ईरान के जास्क पोर्ट के पास रोका गया था, जिसके बाद उसके चालक दल को हिरासत में ले लिया गया। यह जहाज पलाऊ के झंडे के साथ चल रहा था। खाड़ी क्षेत्र में ईरानी बल अक्सर उन जहाजों को निशाना बनाते हैं जिन पर अवैध ईंधन परिवहन का संदेह होता है। हालांकि, भारत सरकार ने नाविकों की गिरफ्तारी के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है।
भारत की 'शांत कूटनीति' आई काम
ईरान के साथ अपने मजबूत राजनयिक व ऊर्जा संबंधों और दूसरी तरफ अमेरिका व इजरायल के साथ करीबी रिश्तों को देखते हुए भारत ने इस संवेदनशील मामले में बेहद संतुलित रुख अपनाया। भारत ने बिना किसी सार्वजनिक बयानबाजी या हो-हल्ले के पर्दे के पीछे से 'शांत कूटनीति' का सहारा लिया, जिससे नाविकों की बिना किसी विवाद के सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी।
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यह घटना होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़े भारी तनाव के बीच सामने आई है। इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य हमलों के बाद से ईरान ने इस समुद्री मार्ग पर अपनी निगरानी और जहाजों की धरपकड़ काफी तेज कर दी है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से गुजरता है। भारत भी अपनी जरूरत का लगभग आधा कच्चा तेल इसी मार्ग से आयात करता है।