मोजतबा खामेनेई का पता बताने वाला हो जाएगा मालामाल, मिलेगा 92.47 करोड़ रुपये का इनाम और US की सिटीजनशिप
U.S. Department of State ने ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत मोजतबा और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर से जुड़े अधिकारियों की जानकारी देने वालो ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 14 Mar 2026 07:45:53 AM (IST)Updated Date: Sat, 14 Mar 2026 07:52:33 AM (IST)
अमेरिका ने मोजतबा खामेनेई पर रखा इनाम। (फोटो- एआई जनरेटेड)HighLights
- अमेरिकी विदेश विभाग ने इनाम योजना की घोषणा की।
- सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
- अमेरिका में बसने की सुविधा मिल सकती है।
डिजिटल डेस्क, इंदौर। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ 28 फरवरी की रात को युद्ध छेड़ दिया था। उसके हमले में इरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। उसके बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया। अब अमेरिका और इजरायल के टारगेट पर मोजतबा आ गए हैं।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो आयतुल्ला अली खामेनेई पर हुए हमले में मोजतबा भी गंभीर घायल हो गए थे। वह इस समय कोमा में हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। वह मौजूदा लीडरशिप को भी खत्म कर देना चाहते हैं।
ऐसे में अमेरिका ने एलान किया है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़े कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का पुख्ता पता बताने वालों को 10 मिलियन डॉलर का इनाम मिलेगा। यह राशि भारतीय रुपयों में 92,47,48,000 रुपये तक की होती है। यह घोषणा अमेरिकी विदेश विभाग के ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत की गई है, जिसका संचालन राजनयिक सुरक्षा सेवा करती है।
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अमेरिका में बसने का भी मिलेगा मौका
- अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार ये लोग उन नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न गतिविधियों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल रहे हैं। ‘रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे नेटवर्क को कमजोर करना है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।
कार्यक्रम के तहत सूचना देने वाले व्यक्तियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षा प्रदान करने, स्थानांतरण सहायता देने और अमेरिका में बसने का अवसर भी दिया जा सकता है। ईरान के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तेज कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना ईरानी ठिकानों पर और सख्त कार्रवाई कर सकती है।