
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश में नौकरी और लाखों-करोड़ों रुपये के सैलरी पैकेज का आकर्षण भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच काफी ज्यादा है। सोशल मीडिया पर अक्सर यूरोप समेत दूसरे देशों में मिलने वाली बड़ी सैलरी की चर्चा होती है। हालांकि, ग्रॉस पैकेज से टैक्स और सोशल कंट्रीब्यूशन जैसी कटौतियां होने के बाद कर्मचारी के हाथ में कितनी रकम आती है, इसकी तस्वीर अलग हो सकती है। जर्मनी में काम करने वाली भारतीय प्रोडक्ट मैनेजर सिमरन खोखा ने स्विटजरलैंड की एक पे-स्लिप और टैक्स ब्रेकअप शेयर कर इसी अंतर को समझाया है।
सिमरन खोखा ने इंस्टाग्राम पर स्विटजरलैंड की पे-स्लिप और टैक्स ब्रेकअप साझा किया। उनके मुताबिक, स्विटजरलैंड में 180,000 CHF का सालाना ग्रॉस पैकेज भारतीय मुद्रा में करीब 2 करोड़ 15 लाख रुपये के बराबर है। हालांकि, यह पूरी रकम कर्मचारी के बैंक खाते में नहीं पहुंचती।
पे-स्लिप के अनुसार, टैक्स लगाए जाने से पहले सोशल कंट्रीब्यूशन यानी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कटौतियां की जाती हैं। इसके बाद अन्य जरूरी कटौतियों और स्टैंडर्ड डिडक्शन को ध्यान में रखते हुए टैक्सेबल इनकम करीब 156,000 CHF रह जाती है। इसी रकम पर सरकार की ओर से टैक्स लगाया जाता है।
सिमरन के मुताबिक, स्विटजरलैंड में टैक्स की व्यवस्था तीन अलग-अलग स्तरों पर होती है। पे-स्लिप में दिए गए ब्रेकअप के आधार पर 180,000 CHF के सालाना पैकेज पर कुल टैक्स करीब 33,354 CHF बताया गया है।
सभी टैक्स और सोशल फंड्स की कटौती के बाद शुरुआती 180,000 CHF पैकेज में से करीब 129,144 CHF सालाना नेट सैलरी बचती है। यानी कर्मचारी को हर महीने लगभग 10,762 CHF इनहैंड मिलते हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 13 लाख रुपये प्रति माह बैठती है।
सिमरन ने पे-स्लिप साझा करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि विदेश में नौकरी के दौरान टैक्स और अन्य कटौतियों के नियम हर शहर और इलाके में अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विदेशी नौकरी के ग्रॉस पैकेज को सीधे इनहैंड सैलरी मानना सही नहीं है।