
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय जहाजों और नाविकों पर खतरा लगातार बना हुआ है। चार दिनों में तीन जहाजों पर अमेरिकी हमलों और तीन भारतीय नाविकों की मौत की घटनाओं के बीच रविवार को एक और बड़ा हादसा सामने आया। ओमान तट के पास मशीनीकृत सेलिंग वेसल (MSV) विराट-1 का इंजन फेल होने के बाद जहाज समुद्र में डूब गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि जहाज में सवार सभी 14 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि विराट-1 तकनीकी खराबी के कारण डूबा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जहाज पर किसी हमले की खबर सही नहीं है और मामले की जांच जारी है।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार विराट-1 ओमान तट से लगभग 80 समुद्री मील पूर्व में रास अल हद्द के पास मौजूद था। इंजन फेल होने के बाद जहाज में मौजूद सभी नाविकों ने लाइफराफ्ट में शरण ली।
इसके बाद ओमानी अधिकारियों के समन्वय में बड़े स्तर पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया। आसपास मौजूद जहाजों और अमेरिकी नौसेना ने भी तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। काफी देर तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अब सभी नाविक सुरक्षित मुंबई लौट रहे हैं।
रेस्क्यू अभियान में अमेरिकी नौसेना की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। अमेरिकी नौसेना के पी-8 समुद्री गश्ती विमान ने संकट की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई की और जहाज के पास एक अतिरिक्त लाइफ राफ्ट गिराया। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना ने पास मौजूद व्यापारिक जहाज एमवी जबाल अली 9 से भी सहायता उपलब्ध कराई। यह जहाज सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे वाला वाणिज्यिक पोत बताया गया है।
इसी बीच ओमान के दुक्म पोर्ट पर खड़े एमटी सेलेस्टियल जहाज में सवार भारतीय नाविक निशांत उर्थनाथन की मौत हो गई। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि उनकी मृत्यु चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई।
नाविकों के संगठन फारवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया के अनुसार निशांत गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे और 11 जून को उनका निधन हो गया। भारतीय दूतावास पार्थिव शरीर को भारत भेजने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
ईरान के सर्वोच्च नेता के उप-प्रतिनिधि मोहम्मद हुसैन जियाई निया ने ओमान तट के पास जहाजों पर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों में तीन भारतीय नाविकों की मौत की निंदा की है।
कलमकार परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान और अन्य देशों के जहाजों पर होने वाले हमले जल्द रोके जाएंगे।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए हमलों का मुद्दा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया। दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत हुई।
जयशंकर ने वाणिज्यिक जहाजों पर घातक कार्रवाई की कड़ी निंदा की। वहीं मार्को रूबियो ने कहा कि होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी आदेशों का पालन करना आवश्यक है।