
डिजिटल डेस्क। 28 फरवरी को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया। इस मिशन में इजरायल ने भी सहयोग किया। संयुक्त कार्रवाई के तहत ईरान की रणनीतिक सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया।
हमलों के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी विस्फोट की खबर आई। इसके बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उनकी मौत की खबरें तेजी से फैलने लगीं।
क्या था ऑपरेशन एपिक फ्यूरी?
यह एक कॉम्बैट मिशन था, जिसे अमेरिका ने इजरायल के समर्थन से अंजाम दिया। इसका उद्देश्य ईरान की मिसाइल सुविधाओं, नेवल इंस्टॉलेशन और कमांड सेंटर्स जैसी अहम सैन्य संरचनाओं को निशाना बनाना था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान के मिसाइल और सैन्य ढांचे से संभावित खतरों को रोकने के लिए की गई।
कार्रवाई शुरू होने के तुरंत बाद अमेरिकी अधिकारियों ने इस ऑपरेशन की सार्वजनिक पुष्टि कर दी।
किसे बनाया गया निशाना?
इस संयुक्त अभियान में ईरान के अलग-अलग हिस्सों में स्थित सैन्य ठिकानों और नौसैनिक ठिकानों को टारगेट किया गया। हमले के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक वीडियो जारी कर कहा कि ऑपरेशन का मकसद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
अमेरिका का कहना था कि यह कार्रवाई ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त संदेश देने के लिए भी थी। ट्रंप ने पहले ही ईरान को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि वह अमेरिकी मांगों को स्वीकार करे।
ईरान की प्रतिक्रिया
हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी ठिकानों और इजरायल पर बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस घटनाक्रम से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
खामेनेई की मौत की खबरों के बाद ईरान में 40 दिनों के शोक की घोषणा की गई और बदला लेने की बात कही गई। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
ट्रंप की अपील और वीडियो जारी
डोनल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर वीडियो साझा कर ईरानी नागरिकों से अपनी सरकार के खिलाफ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब सैन्य कार्रवाई पूरी हो जाए तो लोग अपनी सरकार पर नियंत्रण करें।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ऑपरेशन के पहले 24 घंटे का वीडियो जारी किया। इसमें हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS), टॉमहॉक क्रूज मिसाइल, LUCAS वन-वे अटैक ड्रोन और F/A-18 तथा F-35 जैसे फाइटर जेट के इस्तेमाल को दिखाया गया।
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