
डिजिटल डेस्क। चीन द्वारा पाकिस्तान के गुप्त रास्तों का इस्तेमाल कर ईरान को सैकड़ों उन्नत मिसाइलें (MANPADS) सौंपने के दावों पर अब विराम लग गया है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बीजिंग, इस्लामाबाद के जरिए तेहरान को 300 से 400 कंधे पर रखकर दागी जाने वाली हवा में मार करने वाली मिसाइलें भेजने की तैयारी में है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख पाकिस्तान और चीन दोनों ने ही इस कथित हथियार सौदे का कड़ा खंडन किया है।
पाकिस्तानी सेना की जनसंपर्क शाखा 'आईएसपीआर' (ISPR) ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत करार दिया है। सेना का यह स्पष्टीकरण ऐसे संवेदनशील समय पर आया है, जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही भारी तनाव बना हुआ है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि चीनी एयर डिफेंस सिस्टम की पहली खेप जल्द ईरान पहुंचने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, हथियारों की यह खेप पश्चिमी चीन के उरुमकी क्षेत्र से रवाना होकर पाकिस्तान के रास्ते ईरान भेजी जानी थी। हालांकि, इसमें परिवहन के मार्ग (हवाई या जमीनी) को लेकर स्थिति साफ नहीं की गई थी।
मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में पाकिस्तान एक बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहाँ उसकी चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी है, वहीं दूसरी ओर वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी अपने संबंधों को सुधारने में लगा है। हाल ही में पाकिस्तानी थल सेनाध्यक्ष को ट्रंप का समर्थन भी मिला था।
गौरतलब है कि पाकिस्तान खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक मध्यस्थ (पुल) के रूप में पेश करता रहा है। अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के अस्थायी युद्धविराम में भी पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका रही थी।
अमेरिकी हथियारों की कमी और संभावित सप्लाई चेन संकट की खबरों के बीच आई इस रिपोर्ट ने वैश्विक मंच पर हड़कंप मचा दिया था, हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया है। फिलहाल तीनों देशों में से किसी ने भी इस सौदे को स्वीकार नहीं किया है और पाकिस्तान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान को किसी भी तरह के हथियार हस्तांतरण में शामिल नहीं है।
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