पाकिस्तान शांतिदूत या रणनीतिक धोखेबाज? ईरान-अमेरिका विवाद के बीच पाक की सऊदी से 'सीक्रेट डील'
मध्य-पूर्व में युद्ध के बादलों के बीच पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध हो गई है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक 'गोपनीय सामरिक प ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 14 Apr 2026 06:08:05 PM (IST)Updated Date: Tue, 14 Apr 2026 06:08:05 PM (IST)
पाकिस्तान शांतिदूत या रणनीतिक धोखेबाज?HighLights
- पाकिस्तान ने सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर लड़ाकू विमान तैनात किए
- 2025 के SMDA समझौते के तहत पाकिस्तान सऊदी की रक्षा के लिए सैन्य रूप से बाध्य
- इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता विफल, 21 अप्रैल को खत्म हो रहा है युद्धविराम
डिजिटल डेस्क। मध्य-पूर्व में युद्ध के बादलों के बीच पाकिस्तान की भूमिका संदिग्ध हो गई है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ एक 'गोपनीय सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते' (SMDA) के तहत अपने फाइटर जेट्स सऊदी अरब भेज दिए हैं। यह कदम तब उठाया गया है जब पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच सुलह कराने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है।
क्या है सऊदी-पाक 'प्राइवेट डील'?
NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को पाकिस्तान ने सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर अपने लड़ाकू विमानों और सैन्य दस्ते की तैनाती की है।
- एकतरफा शर्त: इस समझौते की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरी तरह एकतरफा है। पाकिस्तान, सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजने को बाध्य है, लेकिन संकट पड़ने पर सऊदी अरब की ओर से पाकिस्तान की रक्षा की कोई समान गारंटी नहीं दी गई है।
समझौते का आधार: यह 2025 में हुआ SMDA समझौता है, जो 1982 के पुराने गोपनीय सैन्य संबंधों का नया विस्तार है। इसके तहत सऊदी अरब की संप्रभुता पर हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। शांति वार्ता की विफलता और दोहरी चाल
पाकिस्तान ने हाल ही में इस्लामाबाद में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच युद्धविराम की बातचीत कराई थी।
वार्ता विफल: यह शांति वार्ता बेनतीजा रही।
समयसीमा: दो हफ्ते के युद्धविराम की समयसीमा 21 अप्रैल को समाप्त हो रही है।
संकट: यदि सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो पाकिस्तान को मजबूरन ईरान के खिलाफ युद्ध के मैदान में उतरना पड़ सकता है।
आर्थिक मजबूरी और घरेलू चुनौतियां
पाकिस्तान की इस वफादारी के पीछे मुख्य वजह आर्थिक संकट है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के स्टेट बैंक में 5 अरब डॉलर से अधिक जमा कर रखे हैं, जो पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था के लिए ऑक्सीजन का काम करते हैं।
शिया समुदाय का दबाव: पाकिस्तान के लिए यह फैसला आत्मघाती भी हो सकता है। उसकी आबादी में शिया समुदाय की बड़ी संख्या है, जिनकी सहानुभूति ईरान के साथ है। ऐसे में ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कदम पाकिस्तान के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।