• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
  • user
मेरी खबरेंuser
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • त्विषा शर्मा केस
  • भोजशाला पर फैसला
  • एलपीजी संकट
  • गर्मी का मौसम
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • विदेश

पाकिस्तान के उद्योगपति ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री को दिया अनोखा ट्रिब्यूट, लाहौर के कॉलेज में समर्पित किया क्लासरूम

सबसे खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च पाकिस्तान के 100 वर्षीय प्रमुख उद्योगपति सैयद बाबर अली ने उठाया है। बाबर अली और हरचरण सिंह बराड़ की दो...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Mohan Kumar
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 03:05:22 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 03:08:06 PM (IST)
  • Join करें
पाकिस्तान के उद्योगपति ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री को दिया अनोखा ट्रिब्यूट, लाहौर के कॉलेज में समर्पित किया क्लासरूम
पाकिस्तानी उद्योगपति ने लाहौर के कॉलेज में भारतीय मित्र के नाम समर्पित किया क्लासरूम ( फोटो- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. पाकिस्तान के उद्योगपति ने भारत के पूर्व मुख्यमंत्री को दिया अनोखा ट्रिब्यूट
  2. लाहौर के 140 साल पुराने एचीसन कॉलेज में सहेजी गई अविभाजित पंजाब की यादें
  3. हेरिटेज प्रोजेक्ट के तहत अविभाजित पंजाब की विरासत को सहेजने की बड़ी मुहिम

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। भारत-पाकिस्तान विभाजन के लगभग आठ दशक बाद, लाहौर का ऐतिहासिक 'एचीसन कॉलेज' दोनों देशों के बीच पुरानी यादों और मोहब्बत का एक अनोखा पुल बन गया है। कॉलेज के 'क्लासरूम नंबर 108' को पंजाब (भारत) के पूर्व मुख्यमंत्री और यहां के पूर्व छात्र रहे हरचरण सिंह बराड़ की याद में समर्पित किया गया है।

उद्योगपति सैयद बाबर अली ने उठाया पूरा खर्चा

इस क्लासरूम में अंग्रेजी, उर्दू और गुरमुखी में 'ईश्वर एक है' लिखी एक पट्टिका लगाई गई है, जिसका अनावरण बराड़ की बेटी बबली बराड़ ने किया। सबसे खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट का खर्च पाकिस्तान के 100 वर्षीय प्रमुख उद्योगपति सैयद बाबर अली ने उठाया है।


बाबर अली और हरचरण सिंह बराड़ की दोस्ती अविभाजित भारत में एचीसन कॉलेज से शुरू हुई थी, जो दोनों देशों के बीच हुए युद्धों और दशकों की राजनीतिक दुश्मनी के बावजूद, 2009 में बराड़ की मृत्यु तक कायम रही। 1989 में जब बराड़ लाहौर गए थे, तब उन्होंने वहां एक लाइब्रेरी अली को समर्पित की थी; अब तीन दशक बाद अली ने भी अपने दोस्त को यह अनूठा ट्रिब्यूट दिया है।

बड़े अभियान का हिस्सा है यह पहल

यह पहल 'लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट' के उस बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत अली ने 1934-43 के अपने कई हिंदू और सिख सहपाठियों व शिक्षकों के सम्मान में क्लासरूम और पट्टिकाओं के लिए फंड दिया है। इस मुहिम के तहत लाहौर में कृष्ण नगर, राम गली और संत नगर जैसे पुराने नामों को भी बहाल किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें- भारत से विश्व तक... कैसे एक प्रस्ताव ने बदला इतिहास और दुनिया को मिली 'योग' की अनमोल विरासत

1947 में विभाजन के वक्त इस कॉलेज के 245 छात्रों में से लगभग 160 हिंदू और सिख थे, जो छुट्टियों में भारत आए और बिगड़े हालातों के कारण कभी लौट नहीं सके। आज एचीसन कॉलेज प्रशासन भारत-पाकिस्तान के बीच एक भावनात्मक पुल बनकर सरहदों के पार बिखरी उनकी दोस्ती, विरासत और बिछड़ने की अनकही कहानियों को पूरी दुनिया के सामने सहेज रहा है।