
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिका में वैध रूप से रहने की चाहत में फर्जी डकैती का नाटक रचने वाले भारतीय मूल के एक शख्स ने अदालत में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया है। मैसाचुसेट्स के बोस्टन में रहने वाले 40 वर्षीय मितुल पटेल ने वीजा धोखाधड़ी के एक अनोखे मामले में खुद को दोषी माना है। इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने अमेरिकी सरकार को चकमा देकर 'यू-वीजा' (U-Visa) हासिल करने के लिए कई नकली वारदातों को अंजाम दिया था।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड रंभाई पटेल था, जिसे मई 2025 में ही अदालत द्वारा दोषी ठहराया जा चुका है। मितुल पटेल ने अमेरिका में रहने की पात्रता हासिल करने के लिए रंभाई को मोटी रकम दी थी। इसके एवज में, अक्टूबर 2023 में वॉर्सेस्टर के एक स्टोर में हथियारों के बल पर एक सोची-समझी डकैती की गई, जिसमें मितुल को 'पीड़ित' के रूप में पेश किया गया। गिरोह ने मार्च 2024 तक मैसाचुसेट्स और आसपास के इलाकों में ऐसी कम से कम छह फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया।
इस साजिश में स्टोर के मालिक भी शामिल होते थे। योजना के तहत एक नकली लुटेरा दुकान में घुसकर सीसीटीवी कैमरे के ठीक सामने क्लर्क या मालिक पर बंदूक तान देता था और पैसे लेकर भाग जाता था। कैमरे के सामने ऐसा करना इसलिए जरूरी था ताकि पुलिस और आव्रजन (Immigration) अधिकारियों को दिखाने के लिए पुख्ता सबूत मिल सके। लुटेरे के भागने के पांच मिनट बाद ही पुलिस को सूचना दी जाती थी। रंभाई इसके बदले दुकान मालिकों को भी हिस्सा देता था।
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यू-वीजा (U-Visa) अमेरिका का एक विशेष गैर-आप्रवासी वीजा है, जो उन विदेशी नागरिकों को मिलता है जो किसी गंभीर अपराध के पीड़ित रहे हों और जिन्होंने जांच में पुलिस की मदद की हो। इस गिरोह के जरिए वीजा पाने की कोशिश कर रहे 10 अन्य भारतीय भी अवैध रूप से रह रहे थे, जिनमें से दीपिकाबेन पटेल को भारत डिपोर्ट किया जा चुका है। अन्य आरोपियों में जितेंद्रकुमार, महेशकुमार, संजयकुमार, रमेशभाई, अमिताभेन, रोनककुमार, संगीताबेन, मिंकेश और सोनल पटेल शामिल हैं। इस मामले में मितुल पटेल को 29 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।