
डिजिटल डेस्क। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध गुरुवार को छठे दिन में पहुंच गया। इस बीच संघर्ष का दायरा पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर और आसपास के क्षेत्रों तक फैलता नजर आ रहा है।
अमेरिकी नौसेना ने हिंद महासागर में भारत से लौट रहे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को निशाना बनाया, जबकि ईरान के दो ड्रोन अजरबैजान के क्षेत्र में गिरने की खबर है।
नाटो ने भी दावा किया है कि तुर्की में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल के एक संभावित हमले को विफल कर दिया गया। इन घटनाओं के बाद यह टकराव अब क्षेत्रीय सीमा से आगे बढ़कर बड़े सैन्य संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना 16 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल होने के बाद ईरान लौट रहा था। इसी दौरान श्रीलंका की समुद्री सीमा के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने टारपीडो हमला कर इसे डुबो दिया।
इस युद्धपोत पर करीब 180 नौसैनिक सवार थे। श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक 32 लोगों को बचाया है, जबकि लगभग 100 नाविकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार 87 शव बरामद किए जा चुके हैं।
ईरान का दावा है कि उसका जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था और बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया। तेहरान ने चेतावनी दी है कि इसके जवाब में दुनिया में कहीं भी अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि जिस समय हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत डुबोया गया, उस समय वह भारत का 'मेहमान' नहीं था। सरकारी सूत्रों के अनुसार युद्ध की घोषणा के बाद जहाज ने भारत से किसी तरह की सहायता नहीं मांगी थी।
इसी बीच अजरबैजान ने दावा किया है कि ईरान के दो ड्रोन उसकी सीमा में स्थित नखचिवन क्षेत्र में गिरने से चार लोग घायल हो गए। इसके अलावा चार अन्य ड्रोन सीमा के ऊपर उड़ते देखे गए।
घटना के बाद अजरबैजान ने दक्षिणी क्षेत्र का हवाई क्षेत्र 12 घंटे के लिए बंद कर दिया और चेतावनी दी कि ऐसी घटना दोहराई गई तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि ईरान ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसने नखचिवन को निशाना नहीं बनाया।
इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के 20 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इश्फहान और क़ुम क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों और सैन्य बंकरों को निशाना बनाया गया।
इन हमलों में ईरान की एंटी-एयरक्राफ्ट प्रणाली और कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस युद्ध में करीब 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत हमलों की 19वीं लहर शुरू कर दी है। मिसाइल और ड्रोन हमलों में इजरायल के कई शहरों में एयर सायरन बजते रहे और लाखों लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी।
ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका और इजरायल के सात उन्नत रडार सिस्टम नष्ट कर दिए हैं और थाड मिसाइल रक्षा प्रणाली को भी निष्क्रिय कर दिया।
इधर अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान में सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाना था, लेकिन सुरक्षा कारणों से यह कार्यक्रम अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्ता हस्तांतरण को लेकर चर्चाएं तेज हैं और खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान ने तेल अवीव और यरूशलम के साथ-साथ कुवैत, बहरीन और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन और हिंद महासागर में तैनात एक अमेरिकी विध्वंसक पोत पर भी हमले का दावा किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष इसी तरह फैलता रहा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया के साथ वैश्विक समुद्री मार्गों और व्यापार पर भी पड़ सकता है।