दुबई में भारतीय परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, वेंटिलेटर पर मां, 1.25 करोड़ का आया बिल, युद्ध ने रोकी वतन वापसी की राह
तिलककुमार और उनकी पत्नी शामिनी रमेश आठ साल पहले एक बेहतर भविष्य के सपने लेकर दुबई आए थे। तिलक की मां उनसे मिलने दुबई गई थीं, लेकिन वहां वे एक गंभीर बै ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 14 Mar 2026 03:59:28 PM (IST)Updated Date: Sat, 14 Mar 2026 03:59:28 PM (IST)
दुबई में भारतीय ने लगाई मदद की गुहार।HighLights
- दुबई में वेंटिलेटर पर मां, 1.25 करोड़ का आया बिल
- युद्ध के बीच वापसी के लिए तड़प रहा भारतीय परिवार
- दुबई में फंसे भारतीय ने लगाई सरकार से मदद की गुहार
डिजिटल डेस्क। कभी अपनी सुरक्षा और चकाचौंध के लिए मशहूर दुबई आज युद्ध की आहट से सहमा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण उड़ानों के रद्द होने और आसमान छूती कीमतों ने यहां रह रहे प्रवासियों के लिए जीवन-मरण का सवाल खड़ा कर दिया है। इसी संकट की सबसे दर्दनाक तस्वीर तमिलनाडु के रहने वाले तिलककुमार जलाथु अनिरुथराज के रूप में सामने आई है।
छुट्टियां बिताने गई मां वेंटिलेटर पर, बिल पहुंचा 1.25 करोड़
तिलककुमार और उनकी पत्नी शामिनी रमेश आठ साल पहले एक बेहतर भविष्य के सपने लेकर दुबई आए थे। तिलक की मां उनसे मिलने दुबई गई थीं, लेकिन वहां वे एक गंभीर बैक्टीरियल इन्फेक्शन की चपेट में आ गईं। पिछले 40 दिनों से वे आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं।
अस्पताल का खर्च किसी बुरे सपने जैसा है:
- दैनिक खर्च: ₹3 लाख प्रतिदिन (बिना किसी विशेष स्कैन के)।
- अब तक का कुल बिल: ₹1.25 करोड़ से अधिक।
- डॉक्टरों की सलाह: अभी कम से कम 2 महीने और वेंटिलेटर की जरूरत।
युद्ध ने छीना सस्ता विकल्प
जब तिलक को लगा कि दुबई में इलाज का खर्च उठाना नामुमकिन है, तो उन्होंने अपनी मां को 'मेडिकल रिपेट्रिएशन' के जरिए भारत लाने का फैसला किया।
- पहली कोशिश: 4 मार्च को डॉक्टरों ने कमर्शियल मेडिकल फ्लाइट की अनुमति दी, जिसका खर्च ₹7 लाख था।
- युद्ध का असर: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हमलों के कारण वह फ्लाइट रद्द कर दी गई।
- वर्तमान संकट: अब एकमात्र रास्ता 'प्राइवेट एयर एम्बुलेंस' है। युद्ध के कारण एयर एम्बुलेंस का खर्च सात गुना बढ़कर ₹50 लाख हो गया है।
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मदद की गुहार और चैरिटी की उम्मीद
तिलक का कहना है कि एक मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा इंसान के लिए सवा करोड़ का बिल और 50 लाख की एम्बुलेंस का खर्च उठाना असंभव है। वे अब दुबई की चैरिटी संस्थाओं और भारत सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अस्पताल से भी बिल में रियायत देने की अपील की गई है ताकि वे अपनी मां को वापस देश ला सकें।