
डिजिटल डेस्क। चार पैरों वाले 'रोबोट डॉग्स' (Quadruped Robots) अब केवल टेक शो की शोभा नहीं बढ़ा रहे, बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के सैन्य अभियानों और अत्याधुनिक हथियारों की नई होड़ का केंद्र बन चुके हैं। दुनिया की प्रमुख रोबोटिक्स कंपनियों में शामिल चीन की यूनिट्री रोबोटिक्स (Unitree Robotics) के वैश्विक दबदबे ने अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
आश्चर्यजनक रूप से, यूनिट्री के मशहूर रोबोट डॉग्स की सफलता के पीछे अमेरिकी सेना की रिसर्च लेबोरेटरी और DARPA (Defense Advanced Research Projects Agency) द्वारा पोषित रिसर्च का बड़ा योगदान है। वर्ष 2010 से 2020 के बीच US आर्मी ने 'रोबोटिक्स कोलैबोरेटिव टेक्नोलॉजी एलायंस' को फंड किया था, जिसमें MIT, यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया और बोस्टन डायनामिक्स जैसे प्रमुख संस्थान शामिल थे।
इस रिसर्च के तहत भारी सेंट्रल गियरबॉक्स के बजाय रोबोट के पैरों में ही डायरेक्ट मोटर लगाने का इनोवेटिव डिजाइन विकसित किया गया। इससे रोबोट की फुर्ती और उबड़-खाबड़ जमीनों पर संतुलन बनाने की क्षमता में क्रांतिकारी सुधार हुआ। हालांकि, अमेरिका इस बुनियादी रिसर्च को बड़े पैमाने पर कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग में बदलने में नाकाम रहा। चीन की यूनिट्री ने इसी तकनीक को अपनाकर किफायती और बड़े पैमाने पर बिकने वाले प्रोडक्ट्स (जैसे Unitree Go2) में तब्दील कर दिया।
अमेरिका बुनियादी सॉफ्टवेयर और रिसर्च में मजबूत रहा, लेकिन चीन ने बड़े इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स स्थापित किए। हांगझोऊ में यूनिट्री का बेस ऐसे सप्लायर्स से घिरा है जो मोटर्स, एक्चुएटर्स और रोबोटिक मैग्नेट के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) का सस्ते में उत्पादन करते हैं। इसी सप्लायर नेटवर्क के बल पर यूनिट्री ने केवल 1,600 डॉलर की शुरुआती कीमत पर रोबोट बाजार में उतार दिए और वैश्विक मार्केट पर कब्जा जमा लिया।
हालांकि रोबोट निर्माताओं का कहना है कि ये उत्पाद नागरिक इस्तेमाल के लिए हैं, लेकिन अमेरिकी और चीनी दोनों सेनाओं ने इन्हें युद्ध अभ्यासों में शामिल किया है। राइफल्स और रॉकेट लॉन्चर्स से लैस यूनिट्री रोबोट्स के परीक्षण के वीडियो सामने आए हैं।
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